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    ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला: संसद को दरकिनार कर हथियार डील की पेशकश

    वाशिंगटन: ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, खाड़ी देशों को 8.6 अरब डॉलर के हथियार बेचेगा अमेरिका; ईरान पर युद्ध 'विराम' का दावा

    वाशिंगटन: अमेरिकी प्रशासन ने पश्चिम एशिया में अपने रणनीतिक दबदबे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने अपने चार प्रमुख सहयोगी देशों—इस्राइल, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 8.6 अरब डॉलर (लगभग 72,000 करोड़ रुपये) से अधिक के अत्याधुनिक हथियार बेचने का प्रस्ताव दिया है। विशेष बात यह है कि यह निर्णय अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की अनिवार्य समीक्षा प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए लिया गया है।

    हथियारों के सौदे में क्या है खास?

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन रक्षा सौदों में मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीक शामिल हैं:

    • प्रिसिजन गाइडेड वेपन्स: सटीक लक्ष्य भेदने वाली आधुनिक मिसाइल प्रणालियाँ।

    • मिसाइल डिफेंस रिप्लेनिशमेंट: हवाई हमलों और मिसाइलों से बचाव के लिए रक्षा तंत्र की आपूर्ति।

    • बैटल कमांड सिस्टम: एक एकीकृत युद्ध कमान प्रणाली, जो युद्ध क्षेत्र में त्वरित निर्णय लेने में सक्षम है।

    "ईरान के साथ युद्ध समाप्त": ट्रंप का कांग्रेस को पत्र

    इस रक्षा सौदे के बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी सांसदों को एक औपचारिक पत्र लिखकर सूचित किया है कि ईरान के साथ चल रहा सैन्य संघर्ष अब 'समाप्त' हो चुका है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 7 अप्रैल 2026 के बाद से दोनों देशों के बीच कोई गोलाबारी नहीं हुई है।

    युद्ध शक्तियों का विवाद: यह पत्र असल में 1973 के 'वार पावर्स रेजोल्यूशन' (War Powers Resolution) के कानूनी पेंच को सुलझाने की कोशिश है। इस कानून के तहत, बिना संसद की मंजूरी के शुरू की गई सैन्य कार्रवाई को 60 दिनों के भीतर खत्म करना अनिवार्य होता है। ट्रंप ने दावा किया कि 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ यह संघर्ष अब पूरी तरह थम चुका है।

    ईरान की सैन्य क्षमता पर ट्रंप का बड़ा दावा

    पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के मौजूदा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां अंदरूनी कलह व्याप्त है और यह स्पष्ट नहीं है कि सत्ता की असली बागडोर किसके हाथ में है। ट्रंप ने दावा किया:

    • हालिया संघर्षों के बाद ईरान की नौसेना और वायुसेना काफी कमजोर हो चुकी है।

    • ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन उनके द्वारा दिए गए वर्तमान प्रस्ताव संतोषजनक नहीं हैं।

    • अमेरिका शांतिपूर्ण कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन यदि वार्ता विफल रहती है, तो 'सैन्य विकल्प' अभी भी खुला रखा गया है।

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