मुंबई: मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर की दानपेटी से जुड़े चोरी और हेरफेर के आरोपों पर मंदिर न्यास के अध्यक्ष और पूर्व विधायक सदा सरवणकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे तमाम राजनीतिक हमलों और आरोपों का करारा जवाब देते हुए इसे मंदिर की छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझवीं साजिश करार दिया है।
एसीबी जांच और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई
सरवणकर ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक गड़बड़ियों की भनक लगते ही उन्होंने खुद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संपर्क किया था। इसके बाद एसीबी की कार्रवाई में न्यास के एक अधिकारी समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई, तथा दान में अनियमितता बरतने वाले लगभग 45 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया ताकि वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
विपक्षी धड़े पर राजनीतिक संलिप्तता के गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरवणकर ने गिरफ्तार किए गए अधिकारियों और कर्मचारियों के तार शिवसेना के उद्धव गुट से जुड़े होने का सीधा दावा किया। उन्होंने पूर्व महापौर का नाम लेते हुए कहा कि उनके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि पूर्व के कार्यकालों में हर साल करोड़ों रुपये का वित्तीय अंतर रहता था, जिसे वर्तमान मंडल ने सख्ती से रोका है।
इस्तीफे की मांग खारिज और सीआईडी जांच की मांग
अपने पद से इस्तीफा देने की मांग को सिरे से खारिज करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि जब उन्होंने खुद इस घोटाले का पर्दाफाश कर आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसा है, तो ऐसे में इस्तीफे का कोई औचित्य नहीं बनता। वहीं, न्यासी राहुल लोंढे ने मामले की सीआईडी से जांच कराने की मांग करते हुए पूर्व कार्यकाल के दौरान शिव भोजन थाली योजना के लिए आवंटित राशि का विस्तृत हिसाब सार्वजनिक करने की बात कही है।


