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    छिंदवाड़ा का गजब सरकारी अस्पताल, दो नर्सों ने की महीला की डिलीवरी, पेट में छोड़ा कपड़ा

    छिंदवाड़ा: चांदामेटा के सिविल अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है. आरोप है कि डिलीवरी के दौरान डॉक्टरों ने उसके पेट में कपड़ा छोड़ दिया. जब महिला अपने घर पहुंची तो कुछ दिन के बाद ही उसके पेट में दर्द होने लगा. वह लगातार बीमार रहने लगी. पहले तो उन्हें लगा कि डिलीवरी के बाद कोई बीमारी या फिर कमजोरी की वजह से ऐसा हो रहा होगा. लेकिन जब एक निजी डॉक्टर के पास जांच कराने पहुंचे तो कारण जानकर हैरान हो गए.

    महिला के पेट में कपड़ा, मुश्किल से बची जान
    इटावा के कैलाश साहू ने बताया कि, ''उनकी पत्नी देविका साहू की डिलीवरी चांदामेटा के सरकारी सिविल अस्पताल में हुई थी. डिलीवरी के बाद उनकी पत्नी ज्यादातर बीमार रहने लगी और कुछ दिन बाद शरीर में सूजन भी आ गई. जब उन्होंने छिंदवाड़ा के एक निजी अस्पताल में इसकी जांच कराई तो पता चला कि महिला के पेट में कपड़ा है. महिला का ऑपरेशन कर कपड़ा बाहर निकाल दिया गया है. इसके बाद मुश्किल से पीड़ित देविका की जान बच पाई है.

    डिलीवरी के दौरान छूटा होगा कपड़ा
    निजी अस्पताल में पीड़ित महिला का इलाज कर रही डॉक्टर कंचन दुबे ने बताया कि, ''महिला को जब उनके अस्पताल में लाया गया था तो वह गंभीर थी और शरीर में तेजी से इंफेक्शन फैल रहा था. जब जांच की गई तो पता चला कि प्राइवेट पार्ट के पास कपड़ा फंसा हुआ है, जिसकी वजह से पीरियड के दौरान आने वाले ब्लड में भी बदबू आ रही थी. महिला का ऑपरेशन कर दिया गया है, महिला खतरे से बाहर है.''

     

     

      जिम्मेदारों ने कही जांच करने की बात
      सिविल अस्पताल चांदामेटा की मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर रेणुका सिंह ने बताया कि, ''महिला की दूसरी डिलीवरी थी और डिलीवरी के दौरान कोई भी दिक्कत नहीं थी. इसलिए दो नर्सों में डिलीवरी कराई थी. दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. इस मामले में विस्तृत जांच भी की जा रही है, जिसके बाद विधिवत कार्रवाई भी की जाएगी.''

      सीएम हेल्पलाइन में शिकायत, कार्रवाई करने की मांग
      पीड़िता के पति कैलाश साहू ने अस्पताल के द्वारा की गई लापरवाही की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में भी कार्रवाई करने के लिए की है. उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में व्यवस्थाओं की भी कमी होती है. उनकी पत्नी के साथ इलाज में इतनी बड़ी लापरवाही बरती गई. अगर समय रहते वे निजी अस्पताल में न पहुंचते तो पत्नी की जान जा सकती थी.

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