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    जबलपुर की दो खास फसलों को GI टैग, अब देश-दुनिया में बनेगी अलग पहचान

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के कृषि इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। क्षेत्र के दो सबसे प्रसिद्ध कृषि उत्पादों— 'मटर' और 'सिंघाड़े' को आधिकारिक तौर पर भौगोलिक संकेतक यानी GI (Geographical Indication) टैग प्रदान कर दिया गया है। चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री में आज, 26 जून को सुबह 10 बजे तक के अपडेट के अनुसार यह महत्वपूर्ण रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इस दोहरी सफलता के साथ ही जबलपुर देश का पहला ऐसा क्षेत्र बन गया है, जिसके दो अलग-अलग कृषि उत्पादों को एक साथ यह अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

    अब दुनिया में गूंजेगा 'जबलपुर ब्रांड' का नाम

    GI टैग मिलने का सीधा मतलब यह है कि अब जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को दुनिया भर के बाजारों में अपनी एक अलग और विशिष्ट ब्रांड वैल्यू मिलेगी। यह टैग किसी उत्पाद की उसकी मूल जन्मस्थली और गुणवत्ता की गारंटी होता है। अब जबलपुर की पहचान के नाम पर बिकने वाले इन दोनों उत्पादों को कोई अन्य राज्य या शहर अपने नाम से नहीं बेच सकेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और खेती को भारी बढ़ावा मिलेगा।

    नर्मदा के अमृत जल और उपजाऊ मिट्टी की देन

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जबलपुर के मटर और सिंघाड़े का स्वाद, आकार और उनकी पौष्टिकता देश के अन्य हिस्सों से बेहद अलग और उन्नत है। इसकी सबसे बड़ी वजह जीवनदायिनी नर्मदा नदी का स्वच्छ पानी और यहाँ की बेहद उपजाऊ काली मिट्टी है। यह प्राकृतिक माहौल ही इन फसलों को अनूठा बनाता है। विशेषज्ञ लंबे समय से इन्हें विशेष दर्जा दिलाने की मांग कर रहे थे, जिस पर अब वैश्विक मुहर लग चुकी है।

    नकली ब्रांडिंग पर लगेगी रोक, मिलेगा कानूनी कवच

    यह जीआई टैग न सिर्फ उत्पादों को पहचान देगा बल्कि स्थानीय किसानों को एक मजबूत कानूनी सुरक्षा भी प्रदान करेगा। अब कोई भी बाहरी व्यापारी या बिचौलिया आम मटर या सिंघाड़े को “जबलपुर मटर” या “जबलपुर सिंघाड़ा” बताकर धोखा नहीं दे पाएगा। ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा, जिससे असली और हकदार किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सकेगा।

    किसानों के लिए खुलेंगे मुनाफे और एक्सपोर्ट के नए रास्ते

    इस ऐतिहासिक फैसले के बाद जबलपुर के किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। ब्रांडिंग मजबूत होने से न केवल देश के बड़े महानगरों में इसकी डिमांड बढ़ेगी, बल्कि अब विदेशों में एक्सपोर्ट (निर्यात) के रास्ते भी साफ हो गए हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में यह निर्णय जबलपुर को देश के एक बड़े 'एग्रीकल्चर ब्रांड हब' के रूप में स्थापित करेगा, जिससे कृषि आधारित उद्योगों की बाढ़ आ जाएगी।

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