कोटा। राजस्थान के शिक्षा नगरी के रूप में विख्यात कोटा जिले में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत का सिलसिला एक बार फिर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ दिनों के भीतर हुई इन घटनाओं ने स्थानीय चिकित्सा व्यवस्था और अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को जहां 40 वर्षीय रेशमा की दुखद मौत हुई थी, वहीं शनिवार को उपचार के दौरान एक और महिला ने दम तोड़ दिया। महज 24 घंटे के भीतर दो महिलाओं की जान जाने से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है, हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि अत्यधिक रक्तस्राव रुकने के कारण यह अनहोनी हुई।
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और अत्यधिक ब्लीडिंग बनी जान का जोखिम
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि दम तोड़ने वाली महिला रोशन बैरवा मूल रूप से बारां जिले की रहने वाली थी। वह एक हाई रिस्क पेशेंट थी और उसे गंभीर एनीमिया (खून की कमी) की शिकायत भी थी। महिला का इलाज पहले से ही बारां और कोटा के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा था। शनिवार को उसकी सिजेरियन डिलीवरी कराई गई थी, जिसके बाद उसने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। डिलीवरी के तुरंत बाद महिला को लगातार ब्लीडिंग होने लगी। हालांकि चिकित्सकों ने उसे एक यूनिट रक्त भी चढ़ाया, लेकिन रक्तस्राव नियंत्रित नहीं हो सका। हालत बिगड़ने पर उसे तुरंत ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, जहां तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों के मुताबिक रोशन बैरवा की यह तीसरी प्रेग्नेंसी थी।
पति का बयान और परिजनों द्वारा बिना पोस्टमार्टम शव ले जाना
मृतका के पति महेंद्र ने मीडिया को बताया कि शनिवार की सुबह अचानक उनकी पत्नी की सांसें तेजी से फूलने लगीं और उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल स्टाफ ने उन्हें तुरंत आईसीयू में शिफ्ट कर दिया था। इस पूरी घटना के बाद पुलिस और अस्पताल प्रशासन का कहना है कि परिजनों की तरफ से इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत या रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। मातम में डूबे परिजन बिना पोस्टमार्टम करवाए ही शव को अपने साथ गृह नगर ले गए।
पूर्व की घटनाओं और उठते गंभीर सवाल
गौरतलब है कि इसी वर्ष जुलाई और अगस्त के महीनों में भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच प्रसूताओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने का मामला सामने आया था। हालांकि तब जांच के बाद अस्पताल प्रशासन और उस दौरान ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों को क्लीन चिट दे दी गई थी। अब एक बार फिर महज 24 घंटे के अंतराल में दो प्रसूताओं की मौत हो जाने से प्रसव के दौरान मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं और सुरक्षा मानकों पर फिर से बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं।


