More
    Homeदुनियाबैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस में मिली अनोखी प्रणाली, क्लॉड एआई...

    बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस में मिली अनोखी प्रणाली, क्लॉड एआई ने खोला राज

    वाशिंगटन। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एंथ्रोपिक ने दावा किया है कि उसके एआई मॉडल क्लॉड ने बैक्टीरियोफेज वायरस में एक संभावित अनोखी जैविक प्रणाली की पहचान की है। कंपनी ने इस नई प्रणाली को ‘आर्ट’ यानी ‘एरे एसोसिएटेड रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज’ (ART) नाम दिया है। इस प्रणाली में कुछ विशेषताएं जीन एडिटिंग के चर्चित उपकरण 'क्रिस्पर' से मिलती-जुलती बताई गई हैं। हालांकि, अभी यह साबित होना बाकी है कि यह प्रणाली वास्तव में जीन एडिटिंग करने में पूरी तरह सक्षम है या नहीं।

    950 एआई एजेंटों और 21 घंटे का विश्लेषण

    एंथ्रोपिक के मुताबिक, क्लॉड ने बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरसों में मौजूद आनुवंशिक अनुक्रमों (जेनेटिक सीक्वेंसेस) का गहन विश्लेषण किया और एक असामान्य पैटर्न की पहचान की। इस जटिल प्रक्रिया में लगभग 950 एआई एजेंटों ने दो लाख से अधिक रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एंजाइमों की जांच की। करीब 21 घंटे तक चले इस विश्लेषण के बाद एक संभावित उम्मीदवार सामने आया, जिसे आगे के वैज्ञानिक अध्ययनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    डेनमार्क के शोधकर्ता ने जताई आपत्ति

    इस दावे के सामने आने के बाद डेनमार्क की कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता मारियो रोड्रिग्ज मेस्त्रे ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनकी टीम वर्षों से इसी जैविक प्रणाली पर काम कर रही थी। मेस्त्रे के मुताबिक, उन्होंने अपनी डॉक्टरेट रिसर्च के दौरान क्लॉड का व्यापक इस्तेमाल किया था और एआई के साथ कुछ अप्रकाशित शोध सामग्री भी साझा की थी। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि एंथ्रोपिक की यह खोज पूरी तरह स्वतंत्र थी या इसमें उनके द्वारा साझा की गई जानकारी का कोई प्रभाव था।

    कंपनी का स्पष्टीकरण और पीयर-रिव्यू बाकी

    एंथ्रोपिक ने इस आपत्ति का जवाब देते हुए कहा कि उसका मॉडल उपयोगकर्ताओं की बातचीत के डेटा पर प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) नहीं लेता। कंपनी के अनुसार, एआई एजेंट केवल वैज्ञानिक डेटाबेस में पैटर्न खोजने और परिकल्पनाएं बनाने में मदद करते हैं। फिलहाल, इस शोध को किसी पीयर-रिव्यू वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित नहीं किया गया है और इसकी स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि होना अभी बाकी है, इसलिए इसे प्रमाणित जैविक खोज मानना जल्दबाजी होगी।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here