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    40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचा अमेरिकी कर्ज, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर बढ़ी चिंता

    वाशिंगटन: अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज इतिहास में पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के अभूतपूर्व आंकड़े को पार कर गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश पर कुल उधारी बढ़कर 40.047 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। लगातार बढ़ता बजट घाटा, अनियंत्रित सरकारी खर्च और कर्ज पर ब्याज का भारी बोझ दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए गहरा वित्तीय संकट बनता जा रहा है।

    कर्ज का विभाजन और पिछले वर्षों की तुलना

    इस विशालकाय उधारी को दो प्रमुख भागों में देखा जा सकता है:

    • जनता और संस्थाओं का कर्ज: कुल राशि का लगभग 32.266 ट्रिलियन डॉलर हिस्सा जनता, अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और वित्तीय संस्थाओं के पास बॉन्ड के रूप में मौजूद है।

    • आंतरिक सरकारी कर्ज: शेष लगभग 7.782 ट्रिलियन डॉलर की राशि सरकार के विभिन्न अंतर-विभागीय खातों के मध्य का कर्ज है।

    पिछले वर्षों की तुलना में यह कुल उधारी दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है, जो दर्शाती है कि अमेरिकी प्रशासन ने अपने खर्चों की पूर्ति के लिए उधारी पर निर्भरता बहुत तेजी से बढ़ाई है।

    बजट घाटा और बढ़ते ब्याज का आर्थिक दबाव

    आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी राजस्व और खर्चों के बीच बढ़ता अंतर इस वित्तीय स्थिति का मुख्य कारण है। कोरोना महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए किए गए भारी-भरकम खर्चों ने इस उधारी को चरम पर पहुंचा दिया है। अब इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव ब्याज भुगतान पर दिख रहा है:

    • ऊंची बॉन्ड यील्ड: निवेशक बढ़ते वित्तीय जोखिमों को देखते हुए अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर अधिक रिटर्न (यील्ड) की मांग कर रहे हैं।

    • ब्याज भुगतान का बोझ: बढ़ते कर्ज और ऊंची दरों के कारण सरकार का एक बड़ा राजस्व केवल ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है।

    भविष्य की चुनौतियाँ और कड़े विकल्प

    ट्रेजरी विभाग बॉन्ड बाजार में स्थायित्व बनाए रखने के लिए लगातार विभिन्न नीतिगत प्रयास कर रहा है। हालांकि, इस गहराते संकट से बाहर निकलने के लिए अमेरिका के पास मुख्य रूप से दो ही मार्ग शेष हैं—सरकारी खर्चों में भारी कटौती या करों के जरिए राजस्व बढ़ाना। ये दोनों ही निर्णय कूटनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत जटिल माने जा रहे हैं।

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