रांची। रांची स्थित हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC) से जुड़ी बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने HEC को उन उपक्रमों की सूची से बाहर कर दिया है, जिन्हें बंद करने या विनिवेश के लिए चिन्हित किया गया था। यह फैसला 13 नवंबर को लोक उद्यम विभाग की महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया।
इससे पहले CGO ने 8 फरवरी 2023 को HEC को 18 केंद्रीय उपक्रमों में शामिल कर बंद करने की अनुशंसा की थी। लेकिन अब नए निर्णय ने कर्मचारियों और प्रबंधन को राहत दी है तथा कंपनी के पुनरुद्धार की उम्मीद मजबूत की है।
HEC को बड़ा सहारा: राज्य सरकार खरीदेगी 500 एकड़ जमीन
HEC प्रबंधन ने बताया कि कंपनी को बंद करने के बजाय उसे फिर से खड़ा करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए HEC की 500 एकड़ जमीन खरीदने का प्रस्ताव दिया है।
सीठियो, हटिया और जहर तालाब इलाके में जमीन की पहचान हो चुकी है और जल्द ही प्रस्ताव बोर्ड को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद तीन महीने के भीतर जमीन बिक्री की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। इससे HEC को लगभग 5,000 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।
HEC के पास 550 करोड़ से अधिक के वर्क ऑर्डर
वर्तमान में HEC के पास NMDC, ACL, BHEL हरिद्वार-हैदराबाद, बोकारो स्टील और CCL सहित कई संस्थानों से 550 करोड़ रुपये से ज्यादा के वर्क ऑर्डर हैं।
सिर्फ बोकारो स्टील प्लांट से 33 करोड़ का ऑर्डर मिला है, और आने वाले महीने में और ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।
लगातार घाटे के बावजूद सुधार के संकेत
वित्तीय वर्ष 2024-25 में HEC को 226 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। छह साल के लगातार घाटे, मशीनों की खराब स्थिति और वेतन संकट ने उत्पादन को प्रभावित किया था।
लेकिन HEC श्रमिक संघ के अध्यक्ष सन्नी सिंह के अनुसार पिछले एक वर्ष में कर्मचारियों को नियमित वेतन मिल रहा है और सभी प्लांट सक्रिय हैं।
पुनरुद्धार की दिशा में बड़ा कदम
HEC को जमीन बिक्री से मिलने वाले 5,000 करोड़ रुपये से कंपनी 2,067 करोड़ की देनदारियां समाप्त करेगी, आधुनिक मशीनें खरीदेगी और उत्पादन क्षमता बढ़ाएगी।
रक्षा राज्य मंत्री और रांची सांसद संजय सेठ ने कहा कि
“HEC किसी भी कीमत पर बंद नहीं होगा। केंद्र और राज्य सरकार के बीच सकारात्मक बातचीत जारी है।”
HEC के इस पुनरुद्धार प्रयास से यह उम्मीद मजबूत हो गई है कि जल्द ही यह देश के अग्रणी औद्योगिक संस्थानों में अपनी जगह फिर से बना लेगा।


