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    हमें सुरक्षा परिषद का प्रतिनिधित्व और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए

    न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों की मांग की है। उन्होंने कहा है कि हमें सुरक्षा परिषद के प्रतिनिधित्व और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए बिना किसी देरी के कार्रवाई करनी चाहिए। उनका यह बयान भारत की संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करने के तुरंत बाद आया। हालांकि, एंटोनियो गुटेरेस का निशाना अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस है। गुटेरेस ने बोर्ड ऑफ पीस का नाम लिए बिना उसकी जमकर आलोचना की और कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अलावा कोई दूसरी संस्था या एड-हॉक गठबंधन कानूनी तौर पर सभी देशों को मजबूर नहीं कर सकता है।
    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एंटोनियो गुटेरेस ने एक्स पर पोस्ट में लिखा- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद शांति और सुरक्षा के मामलों पर सभी सदस्य देशों की ओर से कार्रवाई करने का अधिकार रखने वाली अकेली संस्था है। सिर्फ यही ऐसे फैसले लेती है जो सभी पर लागू होते हैं। कोई भी दूसरी संस्था या एड-हॉक गठबंधन कानूनी तौर पर सभी देशों को शांति और सुरक्षा पर फैसलों का पालन करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। इसकी जिम्मेदारी अनोखी है। इसका दायित्व सार्वभौमिक है। इसीलिए सुधार जरूरी है। इसीलिए हमें सुरक्षा परिषद के प्रतिनिधित्व और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए बिना किसी देरी के कार्रवाई करनी चाहिए।
    बता दें भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अब अंतरराष्ट्रीय शांति सुनिश्चित करने वाली संस्था के रूप में नहीं देखा जा रहा है और शांति एवं सुरक्षा से जुड़े परिणाम हासिल करने के लिए चर्चाएं समानांतर बहुपक्षीय ढांचों की ओर बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत ने ‘अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन की फिर पुष्टि: शांति, न्याय और बहुपक्षवाद को पुनर्जीवित करने के मार्ग’ विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा कि सार्वभौमिक सदस्यता वाले बहुपक्षवाद, जिसके केंद्र में संयुक्त राष्ट्र है, पर दबाव बढ़ रहा है। इस संगठन के सामने चुनौतियां केवल बजटीय नहीं हैं। संघर्षों से निपटने में जड़ता और प्रभावहीनता इसकी एक बड़ी कमी बनी हुई है।
    बता दें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा के लिए बोर्ड ऑफ पीस शुरू किया है, जिसे संयुक्त राष्ट्र के विकल्प या प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने पीएम मोदी समेत कई वैश्विक नेताओं को अपने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। यह बोर्ड गाजा में स्थायी शांति लाने और वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए एक नए साहसपूर्ण तरीके पर काम करेगा। पिछले हफ्ते दावोस में विश्व आर्थिक मंच के मौके पर एक कार्यक्रम में, ट्रंप ने शांति बोर्ड के घोषणापत्र को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी। ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर काम करेंगे, और जिन देशों ने इसके घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं उनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अज़रबैजान, बहरीन, बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कज़ाकिस्तान, कोसोवो, मंगोलिया, मोरक्को, पाकिस्तान, पैराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और उज़्बेकिस्तान शामिल हैं।

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