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    आषाढ़ विनायक चतुर्थी कब है? 13 घंटे के लिए बनेगा रवि योग, उस दिन भूलकर भी न देखें चंद्रमा

    आषाढ़ विनायक चतुर्थी को अनिरुद्ध चतुर्थी के नाम से भी जानते हैं. यह व्रत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस बार आषाढ़ विनायक चतुर्थी के दिन 13 घंटे के लिए रवि योग का निर्माण होगा. इस योग में कोई दोष नहीं होता क्यों​कि सूर्य का प्रभाव अधिक होता है. जुलाई की विनायक चतुर्थी पर आपको भूलकर भी चंद्रमा का दर्शन नहीं करना है. आइए जानते हैं आषाढ़ विनायक चतुर्थी की तारीख, मुहूर्त, रवि योग, चंद्रोदय समय के बारे में.
    आषाढ़ विनायक चतुर्थी 2026 तारीख

    वैदिक पंचांग के अनुसार, 17 जुलाई को सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का शुभारंभ होगा और यह तिथि 18 जुलाई को प्रात:काल में 4 बजकर 42 मिनट पर खत्म हो जाएगी. ऐसे में आषाढ़ विनायक चतुर्थी का व्रत 17 जुलाई दिन शुक्रवार को रखा जाएगा.

    जो लोग आषाढ़ विनायक चतुर्थी का व्रत रखेंगे, उनको विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा के लिए 2 घंटे 45 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त होगा. आप दिन में 11 बजकर 5 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 50 मिनट के बीच विनायक चतुर्थी की पूजा कर सकते हैं.
    रवि योग में जुलाई की विनायक चतुर्थी

    विनायक चतुर्थी के दिन ​रवि योग बन रहा है. रवि योग सुबह में 5 बजकर 34 मिनट पर शुरू होगा और शाम को 6 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. उस दिन व्यतीपात प्रात:काल से लेकर रात 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. उसके बाद से वरीयान योग होगा. व्रत के दिन मघा नक्षत्र सुबह से लेकर शाम 06:34 पी एम तक रहेगा, उसके बाद से पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र है.

    12 घंटे 56 मिनट तक न देखें चंद्रमा
    विनायक चतुर्थी के अवसर पर चंद्रमा का दर्शन वर्जित है, ऐसा करने से झूठे आरोप लगते हैं. आषाढ़ विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रोदय सुबह में 8 बजकर 37 मिनट पर होगा और रात 9 बजकर 33 मिनट पर चंद्रास्त होगा. ऐसे में आपको 12 घंटे 56 मिनट तक चंद्रमा नहीं देखना है.
    विनायक चतुर्थी की शाम से लगेगी भद्रा
    इस बार विनायक चतुर्थी की शाम से भद्रा का साया रहेगा, ले​किन व्रत और पूजा में कोई बाधा नहीं होगी. भद्रा शाम को 5 बजकर 29 मिनट से प्रारंभ होगी और 18 जुलाई को प्रात: 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगी. इस भद्रा का वास धरती पर है, इसलिए आप इस समय में कोई नया या शुभ काम न करें

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