More
    Homeधर्म-समाजकन्या पूजा कब करें, दुर्गा अष्टमी या महानवमी? कौन सा दिन है...

    कन्या पूजा कब करें, दुर्गा अष्टमी या महानवमी? कौन सा दिन है सही, देवीभागवत पुराण से जानें

    नवरात्रि के समय में कन्या पूजा का विधान है. मान्यताओं के अनुसार कन्याओं को नवदुर्गा का स्वरूप माना जाता है. इस वजह से नवरात्रि में कन्या पूजा करते हैं, ताकि उनके माध्यम से नवदुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त हो और मनोकामनाएं भी पूर्ण हों. अक्सर देखा गया है कि नवरात्रि में दुर्गाष्टमी या महानवमी के दिन कन्या पूजा करते हैं. लेकिन कन्या पूजा का सही दिन कौन सा है? कन्या पूजा के बारे में देवीभागवत पुराण में उल्लेख मिलता है.
    कन्या पूजा कब करें?

    देवीभागवत पुराण के छठे और सातवें स्कंध में कन्या पूजा के बारे में बताया गया है. नवरात्रि के समय प्रतिपदा से लेकर महानवमी तक यानि पहले दिन से लेकर अंतिम दिन महानवमी तक कन्या पूजा कर सकते हैं.
    लेकिन किसी व्यक्ति के पास समय का अभाव है या जो पहले से नवमी तक लगातार 9 दिनों तक कन्या पूजा न कर पाए तो वे लोग दुर्गाष्टमी या महानवमी के दिन कन्या पूजा करके उनको भोजन कराएं. उनको व्रत का पूरा पुण्य फल प्राप्त होगा.

    दुर्गाष्टमी और महानवमी पर कन्या पूजा
    इस साल दुर्गाष्टमी और महानवमी एक ही दिन 19 अक्टूबर दिन सोमवार को है. ऐसे में आपके लिए प्रतिदिन कन्या पूजा संभव न हो तो 19 अक्टूबर को कन्या पूजा विधि विधान से करें.

    कन्या पूजा मुहूर्त 2026
    दुर्गाष्टमी और महानवमी की पूजा आप सुबह में अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 06:24 ए एम से 07:50 ए एम के बीच कर लें. उसके बाद कन्याओं को आमंत्रित कर आएं. कन्या पूजा शुभ-उत्तम मुहूर्त में सुबह 09:15 ए एम से 10:40 ए एम के बीच कर लें.
    पूजा के लिए कितनी कन्याएं होनी चाहिए?
    नवरा​त्रि की कन्या पूजा के लिए कम से कम 1 कन्या और 1 बालक होना चाहिए. कन्याओं की संख्या 1 से 9 तक रख सकते हैं. बटुक भैरव के रूप में एक बालक को रखते हैं.
    1 कन्या पूजा से ऐश्वर्य, 2 से भोग, 3 से पुरुषार्थ, 4 या 5 से ज्ञान, बुद्धि और विद्या, 6 से सफलता, 7 ये परमपद, 8 से अष्टलक्ष्मी और 9 कन्याओं की पूजा से सभी प्रकार के ऐश्वर्य और वैभव प्राप्त होते हैं

    पूजा के लिए कन्याओं की उम्र
    कन्या पूजा के लिए बालिकाओं की उम्र कम से कम 2 वर्ष की होनी चाहिए. अ​धिक से अधिक 10 वर्ष तक की कन्या की पूजा कर सकते हैं. 2 से 10 साल की कन्या में मां कुंआरी से लेकर देवी सुभद्रा तक के दर्शन होते हैं.
    किस उम्र की कन्या कौन सी देवी का स्वरूप?
    2 वर्ष की कन्या मां कुंआरी, 3 वर्ष की कन्या देवी त्रिमूर्ति, 4 साल की बालिका देवी कल्याणी, 5 वर्ष की कन्या देवी रोहिणी, 6 साल की कन्या मां काली, 7 वर्ष की कन्या मां चंडिका, 8 साल की कन्या मां शांभवी, 9 साल की कन्या मां दुर्गा और 10 साल की कन्या देवी सुभद्रा का स्वरूप होती है.

    इस नवरात्रि आप दुर्गाष्टमी और महानवमी को विधि विधान से कन्या पूजा करके मां दुर्गा का आशीर्वाद ले सकते हैं. उनकी कृपा से आपके कष्ट दूर होंगे और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आएगी.

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here