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    इधर शांति की बातें होतीं रहीं उधर 400 ड्रोन्स और मिसाइलों ने यूक्रेन में मचा दी तबाही

    कीव। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। एक तरफ जहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बहाली के लिए उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन की धरती पर आसमान से तबाही बरस रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि शांति समझौतों पर चल रही चर्चाओं के बीच रूस ने पिछले 24 घंटों में 400 से ज्यादा मौत के दूतों (ड्रोन्स और मिसाइलों) के जरिए उनके देश के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया है। जेलेंस्की का आरोप है कि रूस भीषण ठंड को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर यूक्रेन को घुटने टेकने पर मजबूर करना चाहता है।
    यूक्रेनी राष्ट्रपति के अनुसार, रूस ने अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला करते हुए देश के पावर ग्रिड और बिजली वितरण केंद्रों को छलनी कर दिया है। इस हमले में 400 से अधिक आत्मघाती ड्रोन्स और 40 घातक मिसाइलों का उपयोग किया गया। मास्को के इस हमले ने वोलिन, लविव, रिव्ने और विन्नित्सिया जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। रिव्ने में तो एक रिहायशी इमारत को भी निशाना बनाया गया, जिससे आम नागरिकों में दहशत का माहौल है। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर क्षतिग्रस्त बिजली केंद्रों की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि मास्को ने कूटनीति के बजाय विनाश का रास्ता चुना है और अब दुनिया को मास्को से ठंड को हथियार बनाने की ताकत छीननी होगी।
    इस भीषण तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर यह आई है कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध को समाप्त करने के लिए जून 2026 की समय-सीमा (डेडलाइन) तय कर दी है। ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य है कि इससे पहले दोनों पक्षों के बीच एक ठोस समझौता हो जाए। हाल ही में 4 और 5 फरवरी को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अमेरिका की मध्यस्थता में एक त्रिपक्षीय बैठक हुई थी। हालांकि क्षेत्रीय विवादों और युद्धविराम पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी, लेकिन मानवीय आधार पर एक बड़ी सफलता मिली। लगभग पांच महीनों के अंतराल के बाद दोनों पक्षों ने 314 कैदियों (प्रत्येक पक्ष से 157) की अदला-बदली की है। शांति की इन कोशिशों के बावजूद जमीन पर हालात पेचीदा बने हुए हैं। रूस अभी भी डोनबास क्षेत्र से यूक्रेन की सेना की पूर्ण वापसी की मांग पर अड़ा है, जिसे कीव ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। अब सबकी नजरें अगले चार महीनों के बाद अमेरिका के मियामी में होने वाली त्रिपक्षीय वार्ता पर टिकी हैं। अमेरिका पहली बार अपनी धरती पर इस स्तर की बैठक की मेजबानी करेगा। यह बैठक तय करेगी कि क्या जून 2026 की डेडलाइन हकीकत में बदल पाएगी या यह विनाशकारी युद्ध अपने पांचवें साल में प्रवेश करेगा। फिलहाल, यूक्रेन के नागरिक अंधेरे और कड़कड़ाती ठंड के बीच अगले हवाई हमले के डर में जीने को मजबूर हैं।

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