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    शिवसेना पर किसका हक? शिंदे के वकील ने कोर्ट में उठाया उद्धव की पार्टी संरचना का मुद्दा

    नई दिल्ली। शिवसेना के नाम और 'धनुष-बाण' चुनाव चिन्ह को लेकर दायर याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। उद्धव ठाकरे गुट के वकील कपिल सिब्बल की दलीलों के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कोर्ट में पक्ष रखा। कौल ने 2018 में शिवसेना के संगठनात्मक ढांचे और पार्टी संविधान में हुए बदलावों पर गंभीर सवाल उठाते हुए ठाकरे गुट को घेरा।

    पार्टी संविधान और नियुक्तियों पर उठाए सवाल

    शिंदे गुट के वकील कौल ने अदालत में दावा किया कि 2018 में शिवसेना के संगठन में जिन लोगों को नियुक्त किया गया था, उनमें से कई लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया या चुनाव के जरिए चुनकर नहीं आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के संविधान में अचानक और गैर-लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव किए गए थे। कौल ने कहा कि शिंदे गुट इस संबंध में कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश करना चाहता है।

    पार्टी में तानाशाही और एकाधिकार का आरोप

    अदालत में दलील देते हुए कौल ने कहा कि उस समय पार्टी के भीतर एकाधिकारशाही का माहौल था, जिसके कारण कोई भी नेता अपनी आवाज नहीं उठा पा रहा था। इसी घुटन और परिस्थिति के चलते कई प्रतिनिधि एकजुट हुए और एकनाथ शिंदे की अगुवाई में यह कदम उठाया गया। उन्होंने सवाल किया कि यदि चुनावों में प्रभाव का इस्तेमाल होता है, तो पार्टी के भीतर पद हासिल करने के लिए ऐसा क्यों नहीं हो सकता?

    चुनाव आयोग के फैसले का किया बचाव

    शिंदे गुट के वकील ने चुनाव आयोग द्वारा शिंदे गुट को असली शिवसेना मानने के फैसले का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने ठाकरे गुट के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आयोग ने कोई जल्दबाजी में फैसला नहीं लिया, बल्कि सभी पक्षों को सुनकर और बैठकें करने के बाद ही निर्णय दिया था। कौल ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास ऐसे मामलों में फैसला लेने का पूरा अधिकार क्षेत्र है, जिसे सुप्रीम कोर्ट भी पहले मान्यता दे चुका है।

    उद्धव गुट की चुनौती और मौजूदा स्थिति

    उल्लेखनीय है कि 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने फरवरी 2023 में एकनाथ शिंदे गुट को शिवसेना नाम और चुनाव चिन्ह 'धनुष-बाण' आवंटित कर दिया था। इसके खिलाफ उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत उद्धव गुट को 'शिवसेना (यूबीटी)' नाम और 'मशाल' चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल जारी रखने की अनुमति दे रखी है।

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