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    नवरात्रि के 9 दिनों में क्यों बढ़ जाती है तांत्रिक क्रिया, किसे नुकसान पहुंचाने का होता है मकसद, इससे बचने के क्या है उपाय

    नवरात्रि आते ही माहौल बदल जाता है घर-घर में दीप जलते हैं, मंदिरों में घंटियां गूंजती हैं और मन अपने आप ही भक्ति की ओर खिंच जाता है. लेकिन इस बार की चैत्र नवरात्रि सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ऐसी बन रही है जो तांत्रिक साधनाओं और ऊर्जा जागरण के लिए बेहद खास मानी जा रही है. आमतौर पर लोग इसे भक्ति का पर्व मानते हैं, पर इसके पीछे एक गहरा, रहस्यमय और आध्यात्मिक पक्ष भी छिपा होता है जिसे हर कोई समझ नहीं पाता. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

    ग्रहों की चाल और नवरात्रि की ऊर्जा
    ज्योतिष शास्त्र कहता है कि नवरात्रि के दौरान चंद्रमा की स्थिति और शक्ति का विशेष प्रभाव होता है. इस बार चंद्रमा की स्थिति कुछ ऐसे योग बना रही है, जो मानसिक एकाग्रता और ध्यान के लिए अनुकूल हैं. यही वजह है कि साधक इन दिनों में तांत्रिक क्रियाओं को ज्यादा प्रभावी मानते हैं.

    कई ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब चंद्र और मंगल जैसे ग्रह अनुकूल स्थिति में होते हैं, तब ऊर्जा का स्तर बढ़ता है. यही ऊर्जा तंत्र साधना में मदद करती है. गांवों से लेकर बड़े शहरों तक, कई लोग इस दौरान विशेष मंत्र जाप और साधनाएं करते नजर आते हैं.

    तांत्रिक साधनाओं का बढ़ता प्रभाव
    शक्ति उपासना का खास समय
    नवरात्रि को देवी शक्ति की उपासना का पर्व माना जाता है, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से ये समय ‘ऊर्जा सक्रियण’ का होता है. साधक इस दौरान दुर्गा सप्तशती, देवी महात्म्य और अन्य ग्रंथों का पाठ करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक और आध्यात्मिक बल मिलता है.

    किन पर होता है असर
    पंडित जी के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में चंद्र कमजोर स्थिति में हो या पापी ग्रह के साथ हो ऐसे जातकों पर टोना-टोटका या तांत्रिक क्रियाओं का असर ज्यादा होता है.

    गुप्त नवरात्रि से अलग, पर प्रभावी
    हालांकि माघ और आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि को तंत्र साधना के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन चैत्र नवरात्रि भी किसी मायने में कम नहीं है. इस बार ग्रहों का संयोग इसे और खास बना रहा है.
    रातों में बढ़ती रहस्यमयी ऊर्जा
    ज्योतिषीय मान्यता है कि नवरात्रि की रातों में ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने चरम पर होती है. यही कारण है कि तांत्रिक साधनाएं अक्सर रात के समय की जाती हैं. कई साधक मानते हैं कि इन नौ रातों में ध्यान और साधना करने से जल्दी परिणाम मिलते हैं.
    आम लोगों के लिए क्या है संकेत
    यह जरूरी नहीं कि हर कोई तांत्रिक साधना करे. आम लोगों के लिए भी यह समय बेहद शुभ माना जाता है. रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त लोग भी इन दिनों में थोड़ा समय निकालकर मंत्र जाप, ध्यान या साधारण पूजा कर सकते हैं.

    ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान की गई छोटी-छोटी आध्यात्मिक कोशिशें भी बड़ा असर डाल सकती हैं. उदाहरण के लिए, कई परिवारों में देखा जाता है कि नवरात्रि के दौरान घर का माहौल शांत और सकारात्मक हो जाता है.
    कैसे बचें?
    तांत्रिक क्रियाओं का असर बेशक कुछ समय के लिए होता है लेकिन इसका असर व्यक्ति को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. ऐसे में अपनी सुरक्षा के लिए आपको नियमित रूप से हनुमान जी की अराधना करना चाहिए, इसके अलावा ये भी ध्यान रखना होगा कि किसी व्यक्ति के द्वारा आपको दीया गया प्रसाद या कुछ भी चीज ग्रहण नहीं करना है. साथ ही ध्यान रखें कि चौराहों पर किए गए टोने-टोकटे पर आपका पैर न पड़े. कोशिश करें ऐसी जगहों से बच कर निकलने की.

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