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    निर्जला एकादशी को आखिरा क्यों कहते हैं भीमसेनी? जानें कारण, मुहूर्त और पारण का समय

    निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण और कठिन एकादशियों में से एक मानी जाती है. इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखा जाता है. मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से सालभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है. यही वजह है कि भक्त इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि, लंबी उम्र और मोक्ष की कामना करते हैं.
    आखिर क्यों नाम पड़ा भीमसेन एकादशी?
    पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों में सबसे बलशाली भीमसेन को भोजन बहुत प्रिय था. वे अन्य भाइयों की तरह हर महीने आने वाली एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे. भीमसेन ने महर्षि व्यास से इसका समाधान पूछा. तब व्यास जी ने उन्हें ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि यदि भीम केवल इस एक दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखेंगे तो उन्हें पूरे वर्ष की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होगा. तभी से इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी कहा जाने लगा.
    जानिए तारीख और शुभ मुहूर्त
    साल 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून, गुरुवार को मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून 2026 को शाम 6 बजकर 12 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 25 जून 2026 को रात 8 बजकर 9 मिनट पर होगा. भगवान विष्णु की पूजा का शुभ मुहूर्त 25 जून को सुबह 10 बजकर 39 मिनट से दोपहर 2 बजकर 9 मिनट तक माना जा रहा है. वहीं व्रत का पारण 26 जून 2026 को सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट के बीच करना शुभ रहेगा.

    भगवान विष्णु की कृपा
    धार्मिक मान्यता के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है. इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. मंदिरों में विशेष भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं. कई लोग इस दिन जरूरतमंदों को पानी, फल, कपड़े और अनाज का दान भी करते हैं. माना जाता है कि इससे जीवन में सुख और शांति बनी रहती है. साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है.

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