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    Homeराज्यमध्यप्रदेशरेल में वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़, अटेंडेंट की मदद से ले जाए...

    रेल में वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़, अटेंडेंट की मदद से ले जाए जा रहे थे 311 कछुए

    भोपाल। भोपाल (Bhopal) में वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (Madhya Pradesh State Tiger Strike Force- STSF) ने रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (Railway Protection Force- RPF) और भोपाल वन मंडल के साथ संयुक्त कार्रवाई में 19322 पटना-इंदौर एक्सप्रेस (Patna-Indore Express) के एसी फर्स्ट क्लास कोच से 311 दुर्लभ और संरक्षित कछुए बरामद किए। यह कार्रवाई संत हिरदाराम रेलवे स्टेशन पर की गई।

    कोच अटेंडेंट की मदद से तस्करी
    जांच में सामने आया कि यह अंतरराज्यीय गिरोह उत्तर प्रदेश की नदियों, खासकर गंगा और गोमती व उनकी सहायक धाराओं से कछुओं को पकड़कर एसी फर्स्ट क्लास कोच के जरिए मध्य प्रदेश लाता था। आरोप है कि कोच अटेंडेंट (रेलवे कर्मचारी) की मदद से कछुओं को छिपाकर ले जाया जाता था। बरामद कछुए कोच अटेंडेंट अजय सिंह राजपूत के कब्जे से मिले, जो कथित तौर पर गिरोह के लिए कूरियर का काम कर रहा था।

    बेहद खराब कंडीशन में कैद थे कछुए
    एक रिपोर्ट के मुताबिक- जब्त प्रजातियों में क्राउन रिवर टर्टल, इंडियन टेंट टर्टल और इंडियन रूफ्ड टर्टल शामिल हैं। ये सभी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित हैं। अधिकारियों के मुताबिक कछुओं को बेहद खराब और दमघोंटू परिस्थितियों में पैक किया गया था, जिससे कई निर्जलित और तनावग्रस्त हो गए थे।

    बड़े नेटवर्क के खुलासे की संभावना
    आगे की जांच में टीम उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंची, जहां साढ़े 17 वर्षीय एक किशोर को हिरासत में लेकर भोपाल के सुधार गृह भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, सुल्तानपुर और अमेठी जैसे जिलों में सक्रिय था।

    गिरोह का मास्टरमाइंड देवास निवासी आसिफ खान बताया जा रहा है, जिसे 10 फरवरी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया गया। पूछताछ में वित्तपोषकों और गुजरात-महाराष्ट्र तक फैले नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है।

    तस्करी करने वाले को क्या सजा मिलती है
    विशेषज्ञों का कहना है कि कछुए जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनके अवैध शिकार से नदियों का संतुलन बिगड़ता है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजातियों की तस्करी पर सात साल तक की सजा और न्यूनतम 25 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। अधिकारियों के अनुसार, रेलवे मार्गों का इस्तेमाल कर कई वर्षों से यह रैकेट संचालित हो रहा था। हालिया कार्रवाई से बड़े नेटवर्क के उजागर होने की उम्मीद है।

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