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    TCS में AI कर्मचारियों का बढ़ेगा दबदबा? एन चंद्रशेखरन बोले- 3 साल में इंसानों के बराबर होगी संख्या

    मुंबई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रसार के बीच रोजगार छिनने की चिंताओं और व्यापारिक संभावनाओं को लेकर देश की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेवा प्रदाता कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने भविष्य का एक बेहद स्पष्ट रोडमैप साझा किया है। टीसीएस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने सोमवार को एक युगांतकारी घोषणा करते हुए कहा कि आगामी तीन वर्षों के भीतर कंपनी के मानव संसाधनों (कर्मचारियों) की संख्या के ठीक बराबर ही 'एआई एजेंट' या 'डिजिटल वर्कर' भी कार्यबल का हिस्सा बन जाएंगे। इस बयान से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि एआई अब महज कोई तकनीकी शोध या प्रयोग नहीं है, बल्कि कॉरपोरेट जगत की भावी प्रगति का मुख्य आधार स्तंभ बन चुका है।

    सालाना एआई रेवेन्यू 2.5 अरब डॉलर के पार और निवेश में भारी तेजी

    कंपनी की 31वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) को संबोधित करते हुए चेयरमैन चंद्रशेखरन ने बताया कि टीसीएस अपने आंतरिक प्रणालियों, समाधानों के ढांचे और वैश्विक क्लाइंट्स से जुड़े कार्यों में एआई एजेंट्स को तैनात करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। उन्होंने शेयरधारकों के सामने दावा किया कि वह समय बहुत नजदीक है जब कंपनी में जितने हाड़-मांस के कर्मचारी होंगे, उतने ही रोबोटिक एआई एजेंट भी काम संभाल रहे होंगे। यदि वित्तीय मोर्चे की बात करें तो पिछले चार क्वार्टर (तिमाहियों) से कंपनी की एआई आधारित कमाई में लगातार 22 फीसदी से अधिक की त्रैमासिक बढ़ोतरी दर्ज हो रही है और वित्त वर्ष 2026 की समाप्ति तक कंपनी का सालाना एआई राजस्व उछलकर 2.5 अरब डॉलर के बड़े आंकड़े को पार कर गया है।

    आईटी क्षेत्र के लिए खतरा नहीं बल्कि सबसे बड़ा अवसर है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

    चेयरमैन चंद्रशेखरन ने एआई के कारण आईटी उद्योग के वजूद पर मंडराने वाले संकट की थ्योरी को पूरी तरह से एक 'भ्रम' और गलतफहमी करार दिया है। उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त किया कि यह तकनीक उद्यमों के लिए कोई खतरा नहीं, बल्कि वैश्विक आईटी सेक्टर्स के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और अनूठा अवसर है। उन्होंने एआई युग में विकास के पांच प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया, जिनमें पुरानी प्रणालियों और बिखरे डेटा का आधुनिकीकरण करना, सप्लाई चेन व कस्टमर जर्नी जैसे मुख्य बिजनेस प्रोसेस को पूरी तरह एआई-संचालित बनाना, एआई गवर्नेंस व डेटा सुरक्षा का प्रबंधन करना, सॉवरेन एआई के तहत सरकारों के डेटा पर पूर्ण नियंत्रण की मांग को पूरा करना (जिसके लिए भारत और यूरोप में विशेष प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं) और कारखानों में 'फिजिकल एआई' यानी रोबोटिक्स को बढ़ावा देना शामिल है। उदाहरण के तौर पर एक वैश्विक कृषि कंपनी के गोदामों में जोखिम भरे कार्यों की निगरानी के लिए चार पैरों वाले उन्नत रोबोट का सफल संचालन किया जा रहा है।

    मुनाफा बढ़कर 52,820 करोड़ रुपये पर पहुंचा और नए सौदों की पाइपलाइन मजबूत

    बाजार की तमाम आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद टीसीएस का व्यावसायिक प्रदर्शन और वित्तीय स्थिति अत्यंत सुदृढ़ बनी हुई है। कंपनी के चेयरमैन के मुताबिक, टीसीएस का ऑपरेटिंग मार्जिन पूरी तरह सुरक्षित है, कुल आय बढ़ रही है और नए प्रोजेक्ट्स हासिल करने की पाइपलाइन पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का समेकित राजस्व (कंसोलिडेटेड रेवेन्यू) 4.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.67 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि कंपनी का शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) 8.8 प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ 52,820 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान कंपनी की कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) 40.7 अरब डॉलर से अधिक रही। उन्होंने अंत में कहा कि जैसे-जैसे इंटेलिजेंस की लागत घटेगी, दुनिया की 75 फीसदी कंपनियां अगले दो सालों में अपना एआई बजट बढ़ाएंगी, जहां मॉडल से ज्यादा 'भरोसा और संदर्भ' मायने रखेगा, और टीसीएस अपने पुराने ग्राहक संबंधों के दम पर इस एआई क्रांति का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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