नई दिल्ली। चक्रवात अर्नब के प्रभाव से हो रही मूसलाधार वर्षा के फलस्वरूप भले ही वर्तमान में तापमान में कुछ नरमी महसूस की जा रही हो, किंतु रविवार से प्रारंभ हो रहे नवंबर माह में मौसम का यह मिजाज बदलने वाला है। मौसम विभाग (IMD) द्वारा शनिवार को जारी आगामी माह के मौसम के दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार, इस नवंबर देश के अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किए जाने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान को लेकर भी कुछ इसी प्रकार के संकेत मिल रहे हैं। इसके विपरीत, हिमालय की तलहटी से लगे क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य अथवा उससे कुछ कम रहने का अनुमान जताया गया है। इसी तरह मध्य भारत के विस्तृत भूभाग और पूर्वोत्तर राज्यों में न्यूनतम तापमान सामान्य या उससे नीचे बने रहने की उम्मीद है।
देशभर में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान
वर्षा के आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि नवंबर के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में औसत से कम बारिश होने की संभावना है। मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम तथा पूर्वोत्तर भारत के कुछ चुनिंदा हिस्सों को छोड़कर शेष देश में वर्षा की कमी दर्ज की जा सकती है। पूरे देश में इस संपूर्ण माह के दौरान लंबी अवधि के औसत (LPA) की लगभग 77 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना है। ऐतिहासिक आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, नवंबर माह में देश भर में वर्षा का दीर्घावधि औसत लगभग 29.7 मिलीमीटर आंका गया है।
विभिन्न क्षेत्रों में सामान्य तापमान की स्थिति
भारत में नवंबर माह के दौरान भौगोलिक स्थिति के आधार पर सामान्य अधिकतम तापमान भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में लगभग 25 से 32 डिग्री सेल्सियस के दायरे में बना रहता है। यदि उत्तर भारत की बात करें तो दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में यह पारा अमूमन 27 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। इसके विपरीत, दक्षिण भारत के गोवा, केरल और तमिलनाडु जैसे तटीय व दक्षिणी राज्यों में मौसम अपेक्षाकृत अधिक उष्ण रहता है, जहां अधिकतम तापमान 32 से 33 डिग्री सेल्सियस या उससे भी ऊपर पहुंच जाता है। दूसरी ओर, पर्वतीय अंचलों जैसे श्रीनगर और लेह-लद्दाख जैसे उच्च तुंगता वाले क्षेत्रों में तापमान सिमटकर 8 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच ही रह जाता है, जबकि मध्य एवं पूर्वी भारत में यह आमतौर पर 28 से 30 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया जाता है।
अल नीनो का प्रभाव और अक्तूबर की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी
मौसम विज्ञानियों के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर क्षेत्र में वर्तमान में अत्यधिक सक्रिय अल नीनो की स्थिति बनी हुई है, और नवीनतम मौसमी मॉडल भी नवंबर-दिसंबर के दौरान इसके और अधिक मजबूत होने का संकेत दे रहे हैं। अल नीनो एक ऐसी वैश्विक जलवायु परिघटना है जिसके प्रभाव से आमतौर पर तापमान में वृद्धि दर्ज की जाती है। विभाग का यह भी मानना है कि बीते अक्तूबर माह के दौरान देश में पड़ी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का एक मुख्य कारण अल नीनो की यही प्रबल स्थिति थी, जिसके तहत अक्तूबर का मासिक औसत अधिकतम तापमान 32.43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो वर्ष 1901 के पश्चात से अब तक का सर्वाधिक है।


