भारत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी घरानों में से एक, टाटा समूह में शीर्ष नेतृत्व की निरंतरता बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है। टाटा संस का निदेशक मंडल मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहा है, जिसमें समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लगातार तीसरे पांच वर्षीय टर्म के लिए बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
2032 तक कमान संभालने की तैयारी
यदि टाटा संस का बोर्ड इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे देता है, तो 'चंद्रा' के नाम से लोकप्रिय एन. चंद्रशेखरन वर्ष 2032 तक समूह के चेयरपर्सन के रूप में अपना पद सुरक्षित कर लेंगे। ध्यान रहे कि उनका मौजूदा दूसरा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होने वाला है। भारत के सबसे विविध और विशाल व्यापारिक समूह के शीर्ष पर इस विस्तार का उद्देश्य नेतृत्व में स्थिरता और एक स्पष्ट रणनीतिक निरंतरता प्रदान करना है।
1987 से लेकर टाटा संस के शिखर तक
एन. चंद्रशेखरन का टाटा समूह के साथ एक लंबा और शानदार कॉर्पोरेट सफर रहा है। उन्होंने साल 1987 में कंपनी के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद, उन्होंने साल 2009 से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक के रूप में सफलतापूर्वक कार्य किया। 25 अक्टूबर 2016 को उन्हें टाटा संस के बोर्ड में नियुक्त किया गया था। बाद में, पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री को पद से हटाए जाने के बाद पैदा हुए विवादों के बीच, 2017 में चंद्रा को टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी की पूरी कमान सौंप दी गई थी। वर्तमान में टाटा संस के इस शक्तिशाली बोर्ड में एन. चंद्रशेखरन के अलावा वेणु श्रीनिवासन, अनीता जॉर्ज, नोएल टाटा, हरीश मनवानी और सौरभ अग्रवाल शामिल हैं। यह बैठक केवल नेतृत्व के भविष्य को तय करने तक सीमित नहीं रहेगी; उम्मीद है कि बोर्ड इस दौरान टाटा समूह की प्रमुख कंपनियों से जुड़े अहम व्यावसायिक अपडेट्स की भी गहन समीक्षा करेगा।
समूह एआई पर लगा रहा दांव
टाटा समूह चंद्रशेखरन के नेतृत्व में भविष्य की तकनीकों पर तेजी से काम कर रहा है। समूह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बड़ा दांव लगाया है और बड़े पैमाने पर समावेशी समाधान विकसित करने के लिए 'ओपनएआई' के साथ साझेदारी की है। खुद चंद्रशेखरन का मानना है कि एआई एक 'सभ्यतागत बदलाव' है और वह इसे भारत के आईटी क्षेत्र के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखते हैं। एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर फैसला इस बात का संकेत होगा कि टाटा संस अपने मौजूदा विजन और तकनीकी बदलावों की दिशा में बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ना चाहता है। शेयरधारकों और कॉर्पोरेट जगत की पैनी नजरें 24 फरवरी की इस बैठक से निकलने वाले अंतिम फैसलों पर टिकी होंगी, क्योंकि यह भारत के कॉर्पोरेट परिदृश्य की भावी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


