More
    Homeबिजनेसचांदी में बड़ी गिरावट के बाद क्या फिर आएगी तेजी? एक्सपर्ट्स ने...

    चांदी में बड़ी गिरावट के बाद क्या फिर आएगी तेजी? एक्सपर्ट्स ने बताया आगे का अनुमान

    मुंबई:चालू वर्ष के दौरान कीमती धातुओं के बाजार में चांदी ने अपने निवेशकों को निराश किया है, जहाँ वर्ष की शुरुआत से अब तक इसकी विनिमय दरों में लगभग 23 प्रतिशत का बड़ा नुकसान दर्ज किया गया है। विशेष रूप से जून महीने के दौरान ही इस धातु में 22 प्रतिशत की तीव्र गिरावट आई। अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में वर्तमान समय में चांदी का भाव करीब 58 डॉलर प्रति औंस के आसपास बना हुआ है, जबकि भारतीय घरेलू बाजार में इसकी कीमत लगभग ₹2.20 लाख प्रति किलोग्राम दर्ज की जा रही है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस वर्ष अब तक भारत में चांदी के मूल्य में लगभग ₹65,000 प्रति किलोग्राम की बड़ी कमी आ चुकी है, यद्यपि इससे पूर्व के एक वर्ष की अवधि में इसने निवेशकों को 50 प्रतिशत से अधिक का सकारात्मक रिटर्न प्रदान किया था।

    कच्चे तेल में उछाल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों का प्रभाव

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी के वैश्विक बाजार पर बने दबाव का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी युद्ध स्थिति के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न हुआ गहरा तनाव है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड इस समय 86 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जो संघर्ष शुरू होने से पूर्व के दामों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। जब तेल महंगा होता है, तो वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ने का अंदेशा गहरा जाता है, जिसके कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' पर नीतिगत ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बनता है। उच्च ब्याज दरों के माहौल में डॉलर इंडेक्स मजबूत होता है, जिससे निवेशक बिना ब्याज वाली धातुओं के बजाय डॉलर आधारित परिसंपत्तियों को प्राथमिकता देने लगते हैं।

    औद्योगिक उपयोगिता और गोल्ड-सिल्वर रेशियो का गणितीय विश्लेषण

    सोने की तुलना में चांदी के दामों में अधिक उतार-चढ़ाव देखा जाता है, क्योंकि यह केवल निवेश का माध्यम न होकर एक प्रमुख औद्योगिक कच्चा माल भी है। सौर ऊर्जा पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहन, डेटा सेंटर और पावर ग्रिड जैसे उभरते क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उपयोग होने के कारण वैश्विक औद्योगिक मांग में मामूली बदलाव भी इसकी दरों को प्रभावित करता है। जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार जब सोना 4,000 से 4,060 डॉलर प्रति औंस के बीच था, तब चांदी 60 से 61 डॉलर प्रति औंस पर बनी हुई थी, जिससे गोल्ड-सिल्वर रेशियो लगभग 67 के स्तर पर दर्ज हुआ। वित्तीय गणित के अनुसार यह अनुपात सोने और चांदी के सापेक्षिक मूल्यांकन को दर्शाता है, जहाँ 70 से अधिक का अनुपात चांदी को सोने के मुकाबले आकर्षक स्तर पर दिखाता है।

    भविष्य की संभावनाएं और निवेशकों के लिए विशेषज्ञों का रणनीतिक दृष्टिकोण

    बाजार के वरिष्ठ विश्लेषकों का आकलन है कि आगामी समय में गोल्ड-सिल्वर अनुपात 65 से 75 के दायरे में बना रह सकता है, जो काफी हद तक अमेरिकी मौद्रिक नीति और वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आती है, तो चांदी सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। वर्तमान विषम वैश्विक परिस्थितियों में बाजार विशेषज्ञों की राय है कि निवेशकों को केवल किसी एक धातु में केंद्रित रहने के बजाय सोने और चांदी में संतुलित पोर्टफोलियो बनाना चाहिए। कम जोखिम उठाने वाले और पूंजी संरक्षण चाहने वाले निवेशकों के लिए सोना उपयुक्त साधन है, जबकि दीर्घकालिक दृष्टिकोण रखने वाले निवेशक गिरावट के दौरान चरणबद्ध तरीके से चांदी में भी अपनी भागीदारी बढ़ा सकते हैं।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here