जयपुर। राजस्थान कांग्रेस के भीतर चल रहा अंदरूनी घमासान और कलह फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रहा है, और पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के बागी तेवर लगातार आक्रामक बने हुए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पार्टी लाइन से हटकर लगातार दिए जा रहे बयानों के बाद अनुशासन समिति ने विश्वेंद्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें उन्हें सात दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया था। तयशुदा सात दिन की मियाद पूरी होने के बाद भी पूर्व मंत्री ने इस नोटिस का कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं और कयासों का बाजार बेहद गर्म हो गया है।
सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट शेयर कर साधा निशाना
नोटिस पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रहने के बाद, विश्वेंद्र सिंह ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर एक लंबी-चौड़ी और बेहद तीखी पोस्ट साझा कर सियासी गलियारों में नया भूचाल ला दिया है। उनकी इस नवीनतम और बेबाक टिप्पणी ने पार्टी के भीतर चल रही बैचेनी को और अधिक बढ़ा दिया है, जिसमें उन्होंने संगठन की मौजूदा कार्यप्रणाली और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पार्टी और संगठन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अपनी इस पोस्ट में विश्वेंद्र सिंह ने बड़े खेद के साथ लिखा कि जिस पार्टी ने देश पर लंबे समय तक शासन किया, आज राजस्थान में उसकी स्थिति यह हो चुकी है कि उसका कोई 'धनी-धोरी' नहीं बचा है और वह पूरी तरह 'रामभरोसे' चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर नेता जिस डाल पर बैठते हैं, उसी को काटने का काम कर रहे हैं, जिसके चलते आज की तारीख में स्वाभिमानी व्यक्तियों का संगठन में दम घुट रहा है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष कर्ताधर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अपने 'अहम और वहम' की राजनीति से बाहर निकलना होगा, अन्यथा जो थोड़ा-بہुत सब कुछ बचा है, वह भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि अब पार्टी में न तो वरिष्ठता का कोई मान-सम्मान बचा है और न ही युवाओं का मार्गदर्शन करने या नारी शक्ति को आगे बढ़ाने की कोई सोच दिखाई देती है।
इष्ट श्री गिरिराज धनी का स्मरण और राजनीतिक उसूल
अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने लिखा कि उन्होंने हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनता की सेवा की है और हमेशा सही का साथ दिया है। विधायक, सांसद और मंत्री पद जैसी जो भी जिम्मेदारियां उन्हें सार्वजनिक जीवन में मिलीं, उन्हें पूरी ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता के साथ निभाया। उन्होंने कहा कि झूठ, फरेब और बेईमानी से कोसों दूर रहकर उन्होंने हमेशा धर्म की राह पर चलते हुए स्वच्छ राजनीति की है और अपने स्वाभिमान के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया।
राजनीतिक भविष्य का फैसला जनता पर छोड़ा
जीवन के इस पड़ाव पर अब उन्हें किसी से कोई विशेष अपेक्षा न होने की बात कहते हुए उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला पूरी तरह से देवतुल्य जनता जनार्दन पर छोड़ दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता का जो भी आदेश होगा, वह उन्हें पूरी तरह शिरोधार्य होगा। अपने इष्ट श्री गिरिराज धनी और भोले बाबा का स्मरण करते हुए उन्होंने भरतपुर संभाग की जनता को अपना सादर प्रणाम प्रेषित किया है। अब देखना यह होगा कि अनुशासन समिति के नोटिस का जवाब न देने और इस तरह खुलकर सार्वजनिक नाराजगी जाहिर करने के बाद पार्टी आलाकमान विश्वेंद्र सिंह के खिलाफ क्या अगला बड़ा कदम उठाता है।


