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    कलम की रफ्तार का विश्व रिकॉर्ड: डॉ. मेघा रानी के नाम सबसे तेज हिंदी हस्तलेखन का खिताब

    रांची। झारखंड की राजधानी रांची के नाम आज एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हो गई है। यहां की खेल और कला प्रतिभाओं के बाद अब साहित्य के क्षेत्र में भी रांची ने वैश्विक मंच पर अपना परचम लहराया है। शहर की जानी-मानी हिंदी लेखिका, समाजसेविका और साहित्य साधिका डॉ. मेघा रानी ने एक ऐसा अभूतपूर्व इतिहास रच दिया है, जिसने हर झारखंडवासी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।

    2 घंटे में रचे 120 मौलिक पन्ने, बनीं दुनिया की सबसे तेज लेखिका

    डॉ. मेघा रानी ने अपनी असाधारण प्रतिभा और एकाग्रता का परिचय देते हुए महज 120 मिनट (2 घंटे) के भीतर पूरे 120 मौलिक (ओरिजिनल) पन्ने हाथ से लिखकर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इस ऐतिहासिक कामयाबी के साथ ही वे आधिकारिक तौर पर दुनिया की सबसे तेज गति से हिंदी में हस्तलेखन (हैंडराइटिंग) करने वाली महिला बन गई हैं। उनके इस रिकॉर्ड को वैश्विक स्तर पर मान्यता दी गई है।

    कठिन परीक्षा और अटूट संकल्प से हासिल किया मुकाम

    इस विश्व रिकॉर्ड की सबसे खास बात यह रही कि डॉ. मेघा रानी ने ये पन्ने कहीं से देखकर या कॉपी करके नहीं लिखे, बल्कि ये उनकी अपनी मौलिक रचनाएं थीं। लगातार दो घंटे तक बिना रुके, पूरी शुद्धता और तेज गति के साथ साहित्य सृजन करना अपने आप में एक बेहद कठिन चुनौती थी। डॉ. मेघा रानी ने साबित कर दिया कि झारखंड की प्रतिभाएं केवल सपने नहीं देखतीं, बल्कि अपनी कड़ी मेहनत, अटूट संकल्प और साधना से उन्हें विश्व पटल पर हकीकत में बदल देती हैं।

    बधाइयों का तांता, साहित्य जगत में खुशी की लहर

    इस शानदार वैश्विक रिकॉर्ड की घोषणा के बाद से ही डॉ. मेघा रानी को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। राज्य के प्रबुद्ध नागरिकों, साहित्यकारों और सामाजिक संगठनों ने इसे झारखंड के लिए एक युगांतकारी पल बताया है। जानकारों का कहना है कि हिंदी भाषा और हस्तलेखन के क्षेत्र में यह रिकॉर्ड आने वाली पीढ़ी के युवाओं और उभरते हुए लेखकों के लिए एक महान प्रेरणा का काम करेगा।

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