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    आंध्र प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने बताया गांवों का महत्व, नई पीढ़ी को दिया बड़ा संदेश

    लखनऊ|  आंध्र प्रदेश के वेंकटचलम (नेल्लोर) में आयोजित स्वर्ण भारत ट्रस्ट के 25वें स्थापना दिवस समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणों और औपनिवेशिक काल ने भारत की स्वावलंबी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आघात पहुंचाया था, परंतु देश के गांवों की आत्मा कभी समाप्त नहीं हुई।

    वंचित बच्चों के सर्वांगीण विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि स्वर्ण भारत ट्रस्ट द्वारा संचालित ब्रिज स्कूल और उत्तर प्रदेश के अटल आवासीय विद्यालय समान विचारधारा के साथ समाज के वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने का कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा ध्येय एक ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण करना है जो अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित हो, परंतु जिसके मन में अपनी भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव, संवेदनशीलता और 'राष्ट्र प्रथम' की निष्ठा हो।

    पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को बताया उत्तर-दक्षिण भारत का सांस्कृतिक सेतु

    स्वर्ण भारत ट्रस्ट के संस्थापक और पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू की सराहना करते हुए सीएम योगी ने उन्हें उत्तर और दक्षिण भारत के मध्य आध्यात्मिक व सांस्कृतिक सेतु की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि भारत के गांव सदियों से अर्थव्यवस्था, सामाजिक जीवन, ज्ञान, कला-शिल्प तथा जल संरक्षण के प्रमुख केंद्र रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि महात्मा गांधी के 'ग्राम स्वराज' और 'बैक टू विलेज' के संकल्प को साकार करते हुए आत्मनिर्भर व स्वावलंबी ग्रामीण संरचना का निर्माण करना समय की मांग है।

    स्वर्ण भारत ट्रस्ट के जनकल्याणकारी और महिला सशक्तिकरण के प्रयासों की सराहना

    वर्ष 2001 में स्थापित स्वर्ण भारत ट्रस्ट के योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं, दंत व नेत्र चिकित्सा, कृषक प्रशिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा से लेकर कंप्यूटर ट्रेनिंग तक ट्रस्ट ने उल्लेखनीय कार्य किए हैं। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं हेतु संचालित आवासीय प्रशिक्षण व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षित वातावरण मिलने पर ही परिवार अपनी बेटियों को स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित करते हैं, जिसमें यह संस्था अग्रणी भूमिका निभा रही है।

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