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    युवा बनाम पुराने नेता: नेपाल में चुनाव मतदान जारी, पीएम सुशीला ने डाला वोट

    काठमांडू। नेपाल की राजनीति के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है, जहाँ देश के सात प्रांतों—कोशी, मधेश, बागमती, गंडकी, लुंबिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम—में आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। जहां प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने भी वोट डाला। चुनावी जंग में पुराने दिग्गजों और नए चेहरों के बीच कड़ा मुकाबला है। एक तरफ कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपनी सत्ता वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ नेपाली कांग्रेस के प्रभावशाली नेता गगन थापा भ्रष्टाचार मुक्ति और रोजगार के वादे के साथ मैदान में हैं। लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह की है। एक रैपर और सिविल इंजीनियर से नेता बने बालेन शाह युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और उन्हें एक बड़े सुधारवादी चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। उनके अलावा राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और जनमत पार्टी जैसे दल भी प्रमुखता से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
    पिछले एक साल से जारी भीषण राजनीतिक उथल-पुथल, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ हुए जन-आंदोलनों के बाद हो रहे ये चुनाव न केवल नई सरकार चुनेंगे, बल्कि नेपाल के लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूती की परीक्षा भी लेंगे। 
    निर्वाचन आयोग ने इस बार मुस्तैदी दिखाते हुए दावा किया है कि प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली (फर्स्ट पास्ट द पोस्ट) की 165 सीटों के नतीजे मतपेटियां इकट्ठा होने के 24 घंटे के भीतर घोषित कर दिए जाएंगे, जो 2022 के चुनाव की तुलना में एक बड़ा सुधार होगा। हालांकि, आनुपातिक प्रतिनिधित्व की 110 सीटों की गिनती में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। नेपाल का चुनावी सिस्टम काफी जटिल है, जहाँ फर्स्ट पास्ट द पोस्ट और आनुपातिक प्रतिनिधित्व का मिश्रण लागू है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटे दलों और विभिन्न सामाजिक समूहों को भी संसद में जगह मिले। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सितंबर 2025 में नेपाल की जेन-जी पीढ़ी ने बेरोजगारी और राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन किया था। उस हिंसा और विरोध प्रदर्शनों के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार ने छह महीने के भीतर चुनाव कराने का जिम्मा संभाला था। 
     

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