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    गुजरात हाईकोर्ट के सवालों से घिरे यूसुफ पठान, दिल्ली दौरे की चर्चाएं भी तेज

    वडोदरा। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे सियासी घमासान और सांसदों की कथित बगावत की खबरों के बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान सांसद यूसुफ पठान की मुश्किलें कानूनी मोर्चे पर भी बढ़ गई हैं। गुजरात के वडोदरा में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने टीएमसी सांसद को कड़ी फटकार लगाई है। माननीय उच्च न्यायालय ने बेहद सख्त लहजे में सवाल पूछा कि बिना किसी वैध अलॉटमेंट (आवंटन) प्रक्रिया को पूरा किए उन्होंने नगर निगम की इस बेशकीमती जमीन पर अपना कब्जा कैसे जमा लिया। यह कानूनी संकट ऐसे समय में आया है जब महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी के बाद यूसुफ पठान का नाम भी उन बागी टीएमसी सांसदों की सूची में उछाला जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर दिल्ली में एनडीए को समर्थन देने के संकेत दिए हैं।

    चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को रखा बरकरार

    हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. रे की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के अगस्त 2025 के उस पुराने फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की। एकल पीठ ने अपने आदेश में यूसुफ पठान को सरकारी भूखंड पर पूरी तरह 'अतिक्रमणकारी' घोषित किया था, क्योंकि जांच में पाया गया था कि बैंक या निगम की तरफ से उनके नाम कोई अलॉटमेंट लेटर जारी नहीं हुआ था और वे बिना किसी भुगतान के उस पर काबिज थे। अदालत ने पठान के वकील से दो टूक पूछा कि उनके मुवक्किल को इस विवादित जमीन को खाली करने में आखिर कितना वक्त लगेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने भारी जुर्माना लगाने के संकेत देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 जून की तारीख मुकर्रर की है।

    बिना नीलामी के 99 साल की लीज पर प्लॉट देने का प्रस्ताव हुआ था खारिज

    यह पूरा विवाद वडोदरा नगर निगम (VMC) के एक पुराने प्रस्ताव और उसके बाद आए गुजरात सरकार के 6 जून 2024 के एक आदेश से जुड़ा हुआ है। नगर निगम ने बिना किसी सार्वजनिक नीलामी या पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के ही इस 978 वर्ग मीटर के आलीशान प्लॉट को 99 साल की लंबी लीज पर सीधे यूसुफ पठान को सौंपने का एक प्रस्ताव तैयार किया था। राज्य सरकार ने नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए नगर निकाय के इस मनमाने प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था और प्रशासनिक अधिकारियों को जमीन से तत्काल अवैध ढांचा गिराकर अतिक्रमण हटाने के कड़े निर्देश दिए थे। इसके बाद ही यह मामला कानूनी लड़ाई में तब्दील होकर हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंचा था।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के लिए बनी पुरानी खेल नीति का वकील ने दिया हवाला

    अदालत की कार्रवाई के दौरान यूसुफ पठान की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता शालिन मेहता ने अपने मुवक्किल का बचाव करते हुए एक नया तर्क पेश किया। उन्होंने दलील दी कि गुजरात सरकार की 25 अक्टूबर 1999 की एक बेहद महत्वपूर्ण खेल नीति को एकल जज की कोर्ट के समक्ष सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जा सका था। वरिष्ठ वकील के मुताबिक, इस पुरानी सरकारी नीति में यह स्पष्ट प्रावधान है कि देश का नाम रोशन करने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को कुछ विशेष नियमों और शर्तों के अधीन सरकारी प्लॉट अलॉट किए जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि यूसुफ पठान एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के तौर पर उन सभी जरूरी विधिक शर्तों को पूरा करते हैं, इसलिए उन्हें अतिक्रमणकारी कहना गलत है।

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