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    अचानक बिगड़ी तबीयत, रास्ते में ही बुजुर्ग महिला की मौत — चेन्नई जा रही थी कपास के काम पर

    अलवर जिले के अलावलपुर क्षेत्र की 60 वर्षीय विष्णुबाई की तबीयत अचानक बिगड़ने से मौत हो गई। वह परिवार के साथ कपास तोड़ने के कार्य के लिए चेन्नई जा रही थीं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल में सुरक्षित रखवाया है।

    मिशनसच न्यूज, अलवर/नौगांवा। जिले के अलावलपुर क्षेत्र से एक दुखद खबर सामने आई है, जहाँ 60 वर्षीय विष्णुबाई नामक बुजुर्ग महिला की सोमवार को यात्रा के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ जाने से मौत हो गई। विष्णुबाई अपने परिवार के साथ कपास तोड़ने के कार्य के लिए चेन्नई जा रही थीं। यह यात्रा उनके लिए रोज़गार की उम्मीद लेकर शुरू हुई थी, लेकिन बीच रास्ते में ही एक अनहोनी घटना ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया।

    जानकारी के अनुसार, विष्णुबाई अपने परिजनों के साथ बस से यात्रा कर रही थीं। कुछ किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद उन्होंने सीने में दर्द और घबराहट की शिकायत की। कुछ ही मिनटों में उनकी हालत बिगड़ गई और वे बेहोश होकर गिर पड़ीं।

    साथ में यात्रा कर रहे परिजनों ने तुरंत उन्हें संभाला और पानी पिलाने की कोशिश की, लेकिन जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही नौगांवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तुरंत 108 एंबुलेंस की मदद से विष्णुबाई को अलवर जिला अस्पताल पहुँचाया गया।

    अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया

    मृतका के परिजन दीनदयाल ने बताया कि विष्णुबाई पूरी तरह स्वस्थ थीं और वे परिवार के साथ हर साल की तरह कपास तोड़ने के काम के लिए दक्षिण भारत जा रही थीं। दीनदयाल ने कहा, “हम लोग सुबह घर से निकले थे, वो बिल्कुल ठीक थीं। रास्ते में अचानक उन्हें चक्कर आया और बेहोश हो गईं। हमें समझ नहीं आया कि क्या हुआ।”

    पुलिस ने शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया है और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। प्रारंभिक जांच के अनुसार, मौत का कारण दिल का दौरा या अत्यधिक थकावट बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।

    यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि ग्रामीण और श्रमिक वर्ग की उस कठोर सच्चाई को भी सामने लाती है जहाँ बुजुर्ग और महिलाएँ भी परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियाँ उठाने के लिए दूरदराज़ राज्यों तक सफर करती हैं।

    ग्रामीण समाज में कपास तोड़ने का काम हर साल हजारों लोगों को दक्षिण भारत जैसे राज्यों तक खींच ले जाता है। लंबे सफर, कठिन श्रम और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के बीच ये मज़दूर वर्ग अक्सर जोखिम उठाता है। विष्णुबाई की मौत ने इस व्यवस्था की एक बार फिर से कड़वी हकीकत उजागर कर दी है।

    स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे प्रवासी श्रमिक परिवारों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर और बीमा योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

    इस दुखद घटना के बाद अलावलपुर क्षेत्र में शोक की लहर है। परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि ग्रामीणों ने परिवार को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है।

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