उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा के साथ अनन्त चतुर्दशी पर दशलक्षण पर्व का हुआ समापन
अलवर। दिगम्बर जैन धर्मावलम्बियों के दस दिवसीय दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन अनन्त चतुर्दशी पर अलवर शहर के जैन मंदिरों में श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना और धार्मिक विधान का दौर शुरू हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सपरिवार मंदिरों में पहुंचे और जिनेन्द्र भगवान की आराधना की।
दिनभर विभिन्न दिगम्बर जैन मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। दोपहर से शाम तक कई मंदिरों में कलशाभिषेक के कार्यक्रम भी हुए। अनन्त चतुर्दशी पर शहर के अनेक जैन व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे, जबकि बड़ी संख्या में जैन धर्मावलम्बियों ने उपवास रखा। जीवन विकास शिविर में शामिल शिविरार्थियों ने भी पर्व के अंतिम दिन धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया।
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की हुई पूजा
जैन पत्रकार महासंघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा की गई। अनन्त चतुर्दशी पर दिगम्बर जैन संत मुनि सौम्य सागर महाराज ने अपने प्रवचनों में ब्रह्मचर्य धर्म का आध्यात्मिक महत्व बताया।
मुनि सौम्य सागर महाराज ने कहा कि ब्रह्म अर्थात आत्मा में रमण करना ही ब्रह्मचर्य है। उन्होंने कहा कि भौतिक सुख-साधन उपलब्ध होने के बावजूद उनसे विरक्त होकर आत्मकल्याण में लगे रहना उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है। ब्रह्मचर्य आत्मा के साथ जुड़ने का नाम है।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपनी आत्मा से जुड़ता है तो उसके जीवन की दिशा और आंतरिक अनुभूति अलग होती है। अपनी ऊर्जा को आत्मकल्याण और सकारात्मक दिशा में लगाने से व्यक्ति के ज्ञान और चेतना का विकास होता है।
सुबह से मंदिरों में चली पूजा-अर्चना
अनन्त चतुर्दशी के अवसर पर सुबह जैन मंदिरों में श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके बाद नित्य नियम पूजा और विभिन्न विधान शुरू हुए। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ जिनेन्द्र भगवान की आराधना की।
कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों के साथ नृत्य करते हुए जिनेन्द्र भक्ति की। मंदिरों में पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहा। बच्चों ने भी धार्मिक कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
धार्मिक आस्था के साथ मनाया पर्व
अनन्त चतुर्दशी के अवसर पर जैन समाज के लोगों ने उपवास और पूजा-अर्चना के माध्यम से पर्व मनाया। मंदिरों में परिवार सहित पहुंचे श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। दशलक्षण पर्व के समापन पर मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक आयोजन भी किए गए।
इस दौरान जैन समाज के लोगों में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। दिनभर मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
26 सितम्बर को निकलेगी भव्य रथयात्रा
जीवन विकास शिविर के समापन अवसर पर 26 सितम्बर को सुबह 6:30 बजे स्कीम नंबर-10 स्थित जैन भवन से भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। रथयात्रा को लेकर जैन समाज में उत्साह है और आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं।
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