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    अब गांवों की चौपाल से उठेगी भाजपा सरकार के खिलाफ आवाज :नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली

    जूली बोले- तीन साल में गांवों को क्या दिया, अब ग्रामीण जनता भाजपा को हकीकत दिखाएगी

    अलवर/जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही कांग्रेस ने नागौर के डेगाना से पंचायत राज चुनाव अभियान का आगाज कर ग्रामीण सियासत में सरकार को घेरने की रणनीति साफ कर दी है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने रविवार को अलवर मोती डूंगरी कार्यालय पर पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों के बायो डाटा लिए।

    जूली ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि निकाय चुनाव के बाद अब ग्रामीण क्षेत्र की जनता के बीच सरकार के कामकाज का हिसाब मांगा जाएगा। कांग्रेस ने 1 अक्टूबर से पंचायत राज चुनाव अभियान की शुरुआत कर दी है।

    जूली ने कहा कि नागौर की धरती से पंचायत राज चुनाव अभियान की शुरुआत करना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहीं से देश में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत हुई थी। इसके बाद बीकानेर में पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वर्गीय रामेश्वर डूडी की पुण्यतिथि पर आयोजित बड़े कार्यक्रम में भी कांग्रेस के कार्यक्रम में जूली ने ग्रामीण मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा।

    तीन साल बाद गांवों में किस मुंह से मांगेंगे वोट?

    जूली ने भाजपा सरकार से सीधा सवाल किया कि सरकार को सत्ता में आए करीब तीन साल हो गए, लेकिन वह ग्रामीण क्षेत्र में अपने काम का कौन सा हिसाब लेकर जनता के बीच जाएगी? उन्होंने सवाल उठाया कि गांवों में बिजली, पानी, सड़क, किसानों की समस्याओं और मूलभूत सुविधाओं को लेकर सरकार ने क्या किया।

    उन्होंने कहा कि अब चुनाव गांव की चौपाल पर होगा और ग्रामीण जनता सरकार के दावों और जमीन पर मौजूद हकीकत के बीच फर्क खुद देखेगी।

    कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना

    नेता प्रतिपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को प्रशासन को किसी राजनीतिक दल के एजेंट की तरह नहीं, बल्कि निष्पक्ष तरीके से कानून के मुताबिक चलाना चाहिए।

    जूली ने खाटू श्याम जी से जुड़े बोर्ड सहित विभिन्न मुद्दों का उल्लेख करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून के राज की जगह राजनीतिक हस्तक्षेप का माहौल बनाया जा रहा है।

    अकाल, पानी और किसान… जूली ने घेरा

    जूली ने ग्रामीण राजस्थान में पानी और अकाल की स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि कई जिले सूखे की मार झेल रहे हैं, पशुधन प्रभावित हो रहा है और लोगों के सामने पेयजल का संकट है।

    उन्होंने श्रीगंगानगर में किसानों के लंबे धरने का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के पास किसानों से मिलने और उनका ज्ञापन लेने तक का समय नहीं है।

    सीएम की घोषणाओं पर कसा तंज

    बाड़मेर में मुख्यमंत्री की ओर से की गई घोषणाओं पर भी जूली ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गर्मियों में लगाए जाने वाले पानी के टैंकरों की अवधि बढ़ाने जैसी घोषणाओं को बड़े स्तर की उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा रहा है, जबकि ऐसी व्यवस्थाओं के लिए पहले से ही जिलों को आकस्मिक निधि उपलब्ध रहती है।

    पंचायती राज के बकाये और चुनाव में देरी का मुद्दा

    जूली ने पंचायती राज संस्थाओं के कथित बकाये का मुद्दा उठाते हुए कहा कि करीब 3 हजार करोड़ रुपये बकाया बताए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लंबे समय तक पंचायत चुनाव नहीं कराए और इससे पंचायती राज संस्थाओं की व्यवस्था प्रभावित हुई।

    उन्होंने इसे संविधान में दिए गए स्थानीय स्वशासन के अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार से सवाल किया कि जब लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव समय पर नहीं होंगे तो गांव की सरकार कैसे मजबूत होगी।

    SIR और चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल

    जूली ने SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने VVPAT और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों का उल्लेख करते हुए पारदर्शिता की मांग की।

    वन स्टेट, वन इलेक्शन पर भी निशाना

    भाजपा के ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के नारे पर जूली ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में एक साथ चुनाव कराने की बात करती है तो अलग-अलग समय पर होने वाली चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

    ग्रामीण क्षेत्र में जनता बताएगी हकीकत

    जूली ने कहा कि पिछला चुनावी मुकाबला शहरी क्षेत्र में था, लेकिन अब लड़ाई गांवों में है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पंचायत स्तर तक संगठन को मजबूत करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण जनता के मुद्दों को लेकर कांग्रेस मजबूती से मैदान में उतरेगी।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस संविधान, लोकतंत्र और पंचायती राज संस्थाओं की मजबूती के मुद्दे पर जनता के बीच जाएगी। जूली ने दावा किया कि भाजपा सरकार के कामकाज को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जो सवाल हैं, उनका जवाब जनता चुनाव में देगी।

    जूली का बड़ा हमला, बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दें, जनता पंचायती राज चुनाव में देगी जवाब

    जूली ने आरोप लगाया कि देश में मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जिस कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा देश के सामने उठाया था, अब उससे जुड़े सवाल लगातार सामने आ रहे हैं।

    जूली ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के फैसलों में पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जूली ने कहा कि यदि मतदाता सूची में नाम हटने के बाद बाद में नाम जोड़ने का मौका दिया भी जाए, तो जिस चुनाव में मतदाता का नाम ही नहीं था, उसमें वह अपने मताधिकार का इस्तेमाल कैसे करता?

    भरतपुर में फॉर्म वापसी और दबाव का आरोप

    भरतपुर का मुद्दा उठाते हुए जूली ने आरोप लगाया कि जिला प्रमुख के चुनाव में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार पर दबाव बनाकर नामांकन वापस करवाने की कोशिश की गई और उसकी फैक्ट्री बंद कराने तक की धमकी दी गई।

    जूली ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों को डराने-धमकाने की राजनीति ज्यादा दिन नहीं चल सकती। उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि फूट के आरोप लगाने से पहले भाजपा को अपने संगठन के भीतर की स्थिति पर नजर डालनी चाहिए।

    सरकार तानाशाही पर उतर आई

    नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर युवाओं और बच्चों की आवाज दबाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले युवाओं पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और पुलिस-प्रशासन के जरिए दबाव बनाने की कोशिश हो रही है।

    जूली ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार का काम जनता की आवाज सुनना है, उसे दबाना नहीं। उन्होंने कहा कि पंचायती राज चुनाव गांवों की जनता का चुनाव है और ग्रामीण मतदाता अपने मुद्दों पर मतदान करेगा।

    उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार की कथित नीतियों और प्रशासनिक रवैये का जवाब जनता पंचायती राज चुनाव में देगी।

    जूली का सीधा संदेश- चुनाव जनता का अधिकार, किसी की जागीर नहीं

    जूली ने कहा कि चुनाव आयोग और सरकार को मतदाता के अधिकार, चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रक्रिया से जुड़े हर सवाल का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जनता का वोट है और उस वोट की विश्वसनीयता पर उठने वाले हर सवाल का समाधान होना जरूरी है।

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