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    अलवर : नीलगाय हत्या कानून के विरोध में विशाल धरना प्रदर्शन, किसान नेता भी हुए शामिल


    अलवर में अहिंसा सर्किल पर विशाल धरना, महिलाओं ने भी भाग लिया 

    अलवर। भारी जनविरोध के बावजूद राजस्थान में लागू नीलगाय हत्या कानून के खिलाफ आज रामनवमी व नवरात्रा के पावन दिन सत्ताधीशों की आत्मा को जगाने के लिए अलवर में विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। धरने की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि राज्य सरकार ने प्रदेशभर में किसानों की फसल रक्षा के नाम पर वन्य प्राणी नीलगायों की गोली मारकर हत्या करने के जो क्रूर प्रावधान लागू किए हुए हैं, उसकी खुली खिलाफत करने के लिए किसानों के ही कई प्रमुख संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी खुद धरने में अपने किसान साथियों के साथ शामिल होने पहुंचे। वहीं सर्वसमाज के करीब 55 जन संगठनों के कई सौ लोगों ने जोश के साथ भागीदारी की।

    हिंदू व सनातन धर्म के महत्वपूर्ण पर्व रामनवमी व नवरात्रा पर होने वाली पूजा-पाठ व अनुष्ठान तक को छोड़कर भी धरने में शामिल होने वाले लोगों का तांता लगा रहा। इनमें काफी संख्या में महिलाएं भी थीं। धरने व प्रदर्शन का यह आयोजन दिगंबर जैन महासमिति अलवर संभाग ने राजस्थान नीलगाय रक्षा आंदोलन के सहयोग व समर्थन से मन्नी का बड़ा अहिंसा सर्किल पर आयोजित किया। धरने पर इतने अधिक लोग एकत्रित हो गए जिनमें बहुत लोगों को बैठने की जगह तक नहीं मिली, लेकिन बावजूद इसके पचासों लोग तेज धूप में भी बाहर सड़क पर धरने के समापन तक मौजूद रहे।

    धरने के दौरान जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया गया, वहीं जनसभा भी हुई। धरने का नेतृत्व महासमिति संभाग अध्यक्ष कुलदीप जैन बड़जात्या व नीलगाय रक्षा आंदोलन से जुड़े ओमप्रकाश गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया, वहीं सभा का संचालन एन.के. जैन कर रहे थे।

    सभा को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) राजस्थान महासचिव भूपत सिंह बाल्यान, अखिल भारतीय किसान महापंचायत के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी, राजस्थान किसान सभा के जिलाध्यक्ष भोला राम शर्मा ने कहा कि प्रदेश का कोई भी किसान नीलगायों की कभी हत्या नहीं करता और न ही किसानों ने कभी नीलगायों की हत्या की मांग की। किसान नेताओं ने इस बात पर तीखा रोष व्यक्त किया कि खुद को हिंदू व सनातन संस्कृति बताने वाले सत्ताधीश किसानों की आड़ लेकर नीलगायों की हत्या करवा रहे हैं और मीट लॉबी के पर्दे के पीछे लालच में आकर हितैषी बने हुए हैं।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने को राम भक्त करने वाली सरकार किसानों के नाम पर नीलगायों की हत्या के पाप को तुरंत बंद करने के लिए उसके हत्या के अमानवीय व क्रूर कानूनों को तुरंत समाप्त करे। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि अभी भी राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम नहीं उठाया तो किसान संगठनों को खुद आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ेगा और गांव-गांव में सरकार की इस बाबत कलई खोली जाएगी।

    सभा में अन्य कई वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि यह दुर्भाग्य है कि अलवर के सांसद व विधायक दोनों केंद्र व प्रदेश के वनमंत्री हैं और उन्हें अनेक संस्थाओं द्वारा ज्ञापन दिए जाने के बावजूद वे नीलगाय हत्या कानून के समर्थक बने हुए हैं, जो शर्म की बात है।

    धरने व प्रदर्शन में शामिल लोगों ने विरोध स्वरूप काले बैंड धारण किए हुए थे, वहीं हाथों में नारे लिखी तख्तियां ले रखी थीं। करीब 20 संस्थाओं द्वारा धरने के समर्थन में बड़े-बड़े बैनर भी प्रदर्शित किए गए।

    धरना प्रदर्शन में महावीर जयंती महोत्सव कमेटी के अध्यक्ष अनिल पालावत सहित सकल जैन समाज के सभी वरिष्ठ पदाधिकारी, आर्य समाज के जिला प्रधान प्रदीप आर्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभागीय संचालक डॉ. के.के. गुप्ता, जैन मुनि सुधासागर गौशाला के संरक्षक बच्चूसिंह जैन, संयुक्त व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह मेहंदी रत्ता, जिला सद्भाव मंच के अध्यक्ष डॉ. एस.सी. मित्तल, राजस्थान शिव सेना के पूर्व प्रदेश प्रमुख राजकुमार गोयल, जिला व्यापारी महासंघ के जिलाध्यक्ष रमेश जुनेजा, विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष रामदयाल मीणा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव तेजपाल सैनी, जिला एटक के जिलाध्यक्ष राजकुमार , आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष जगन्नाथ गोयल, शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सरदार प्रदीप सिंह, स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रवक्ता सचिंद्र कौशिक, राजस्थान कांग्रेस पर्यावरण प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक राजेश कृष्ण सिद्ध, महावर वैश्य सभा के अध्यक्ष रतनलाल गुप्ता, अग्रवाल महासभा के पूर्व अध्यक्ष अमित गोयल सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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