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    अलवर में जल संरक्षण बैठक आयोजित, 10 हजार रेन वाटर हार्वेस्टिंग का लक्ष्य तय

    भू-जल स्तर सुधार के लिए बैठक, घर-घर रेन वाटर हार्वेस्टिंग अभियान शुरू

    अलवर। जल संकट से निपटने और भू-जल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से जिला कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में नगर विकास न्यास (यूआईटी) और नगर निगम के अधिकारियों को वर्षा ऋतु से पहले व्यापक जल संरक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।

    जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि आगामी दो माह में शहर के 10 हजार घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए जाएं। इसके लिए जनजागरूकता अभियान चलाकर आमजन को इस दिशा में प्रेरित किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि अलवर शहर की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए भू-जल स्तर में सुधार अत्यंत आवश्यक है और इसमें वर्षा जल संचयन की महत्वपूर्ण भूमिका है।

    निर्देशानुसार नगर निगम और यूआईटी की टीमें प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 10 बजे तक फील्ड में रहेंगी। ये टीमें घर-घर जाकर लोगों को जल संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक करेंगी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए प्रेरित करेंगी।

    साथ ही भवन विनिर्माण अधिनियम के तहत 225 वर्गमीटर से अधिक भूखंडों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से स्थापित करवाने की पालना भी सुनिश्चित की जाएगी।

    जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि शहर के सभी सार्वजनिक जल स्त्रोतों का तीन दिन में सर्वे कर उनकी पुनर्जीवन योजना तैयार की जाए और शीघ्र कार्य प्रारंभ किया जाए। इससे जल संचयन की क्षमता में वृद्धि होगी और भू-जल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि भवन निर्माण स्वीकृति के समय रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए जमा की गई राशि का उपयोग सुनिश्चित किया जाए और सभी संबंधित भवन मालिकों से 15 दिनों के भीतर सिस्टम स्थापित करवाया जाए।

    इसके अलावा कनिष्ठ भूजल वैज्ञानिक को निर्देश दिए गए कि वे कम लागत और कम स्थान में आसानी से बनाए जा सकने वाले रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के डिजाइन में तकनीकी सहयोग प्रदान करें।

    जिला कलक्टर ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और विकास समितियों को इस अभियान से जोड़कर इसे जन आंदोलन बनाने पर जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि यदि सभी मिलकर प्रयास करें तो अलवर शहर को जल के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

    बैठक में यूआईटी सचिव धाईगुडे स्नेहल नाना, नगर निगम आयुक्त सोहन सिंह नरूका सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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