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    अलवर में जैन संतों का भव्य मंगल प्रवेश, श्रद्धालुओं ने किया जोरदार स्वागत

    मंगल प्रवेश के दौरान जैन ध्वजाएं लहराईं, जयकारों से गूंजा शहर

    अलवर। संत शिरोमणि एवं समाधिस्थ दिगम्बर जैनाचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि विनम्र सागर महाराज ससंघ का गुरुवार को अलवर शहर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस दौरान शहर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। जैन ध्वजाओं, बैंड-बाजों और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने संतों का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    जैन संतों के मंगल प्रवेश के दौरान श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते मुनि विनम्र सागर महाराज
    जैन संतों के मंगल प्रवेश के दौरान श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते मुनि विनम्र सागर महाराज

    जैन पत्रकार महासंघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि मंगल प्रवेश यात्रा स्थानीय अशोक सर्किल स्थित जयन्ती मॉल से प्रारंभ हुई। यात्रा में बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला-पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए और जिनेन्द्र भक्ति के साथ जैन गुरुओं के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े।

    मंगल प्रवेश यात्रा में जगह-जगह हुआ पाद प्रक्षालन

    यात्रा के दौरान जयन्ती मॉल सहित विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने मुनि विनम्र सागर महाराज का पाद प्रक्षालन किया। जैसे-जैसे यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरती गई, लोगों ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों के बाहर संतों का स्वागत किया।

    श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे खड़े होकर धार्मिक उत्साह के साथ शामिल होते दिखाई दिए।

    मंगल प्रवेश के बाद मंदिर में हुआ स्वागत समारोह

    भव्य यात्रा स्कीम नंबर-10 स्थित जैन मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर में मुनि श्री की आरती और पाद प्रक्षालन कर अगवानी की गई। इसके बाद संतों ने मंदिर में दर्शन किए।

    मंदिर परिसर में आयोजित धर्मसभा में समाज के प्रमुख लोगों ने श्रीफल भेंट कर संतों का स्वागत किया।

    मंगल प्रवेश अवसर पर मुनि श्री ने दिए प्रेरक संदेश

    धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि विनम्र सागर महाराज ने कहा कि जीवन में गुरु का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज ने अपने जीवनकाल में गुरु की महिमा को जिस प्रकार बताया, उससे सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि गुरु ही व्यक्ति को सही मार्ग दिखाता है। यदि जीवन में योग्य गुरु नहीं हो तो व्यक्ति भटकाव का शिकार हो सकता है।

    मुनि श्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपना जीवन ऐसा बनाना चाहिए जिससे वह दूसरों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सके और साथ ही आत्मकल्याण का मार्ग भी प्रशस्त कर सके।

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