अलवर के सूर्य नगर में पाश्र्वनाथ–पद्मावती मंदिर के वार्षिकोत्सव में आचार्य विजय मुनि ने इंसानियत, अहिंसा और धर्म के महत्व पर संदेश दिया।
सूर्य नगर में हुआ पाश्र्वनाथ–पद्मावती मंदिर का वार्षिकोत्सव
मिशनसच न्यूज अलवर।
सूर्य नगर स्थित भगवान पाश्र्वनाथ–पद्मावती मंदिर के वार्षिकोत्सव में शनिवार को आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में आचार्य विजय मुनि महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इंसान की सबसे बड़ी पहचान उसकी इंसानियत है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति धर्म के मार्ग पर चलेगा तो उसके जीवन में विवेक, करुणा और संयम का विकास होता है। लेकिन यदि इंसान धर्म से दूर हो जाए तो मनुष्य योनि में जन्म लेने का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
उन्होंने कहा कि जीवन में अहिंसा को अपनाना सबसे बड़ी साधना है। जो व्यक्ति अपने आचरण में अहिंसा को उतार लेता है, वही अपने जीवन को सफल बनाता है। विजय मुनि महाराज ने बताया कि धर्म का मूल उद्देश्य जोड़ना है, तोड़ना नहीं। धर्म मनुष्य को प्रेम, सहयोग और सद्भाव से जोड़कर जीवन को सही दिशा देता है।
धर्म से जुड़ने का आह्वान
विजय मुनि महाराज ने कहा कि इंसान यदि धर्म के मार्ग पर चले तो जीवन की नैया स्वतः पार हो जाती है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को शाकाहार अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शाकाहार अपनाने से मनुष्य का जीवन अहिंसा की ओर बढ़ता है, मूक प्राणियों की रक्षा का भाव जागृत होता है और मनुष्य की चेतना शुद्ध होती है।
उन्होंने कहा कि धर्म का मार्ग केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की पद्धति है। सत्य, अहिंसा और करुणा जैसे गुणों के बिना जीवन अधूरा माना जाता है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि खिल्लीमल जैन का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान के पूर्व नि:शक्तजन आयुक्त खिल्लीमल जैन ने कहा कि समाज में दिव्यांगजनों एवं असहाय वर्ग की सेवा करना मनुष्य का श्रेष्ठ कार्य है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में एक लक्ष्य तय करना चाहिए, जिसमें सेवा भाव हो। असहाय वर्ग के उत्थान के लिए मन, वचन और कर्म से सेवा करना ही वास्तविक मानवता है।
खिल्लीमल जैन ने भी शाकाहार को जीवनचर्या का मूल आधार बताते हुए कहा कि मनुष्य को मूक प्राणियों की रक्षा और अहिंसा को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।
धार्मिक प्रभावना से बढ़ता है सामाजिक सौहार्द
विशिष्ट अतिथि जैन पत्रकार महासंघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में सौहार्द, एकजुटता और धर्म की प्रभावना बढ़ती है। उन्होंने कहा कि आचार्य विजय मुनि महाराज के सानिध्य में होने वाला यह वार्षिक कार्यक्रम समाज को सकारात्मक दिशा देने का माध्यम बन चुका है।
विचार और सानिध्य
कार्यक्रम में सुरेश मुनि महाराज ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की उन्नति धर्म के मार्ग से ही संभव है। उन्होंने लोगों को आत्मविकास, संयम और सदाचार को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया।
इस अवसर पर अरविंद मुनि, चेतना मुनि और साध्वी समीक्षा जी भी मौजूद रहीं, जिनके सानिध्य से श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
अतिथियों का सम्मान और सेवा कार्य
कार्यक्रम में पूर्व नि:शक्तजन आयुक्त खिल्लीमल जैन का विशेष सम्मान किया गया। आचार्य विजय मुनि महाराज ने उन्हें शाकाहार के प्रति समर्पित बताते हुए सम्मानित किया।
समारोह के दौरान बाहर से आए समाजसेवियों, अतिथियों और श्रद्धालुओं का भी माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।
वार्षिकोत्सव के अवसर पर आचार्य विजय मुनि महाराज के हाथों जरूरतमंदों को कंबल और साड़ियां वितरित की गईं। इस अवसर पर श्री चंद्र प्रभु विकलांग कल्याण समिति के अध्यक्ष अशोक जैन अगोनिज, समाजसेवी अशोक मेठी, जिनेश जैन, प्रदीप जैन, नगर परिषद की पूर्व सभापति शकुंतला सोनी, बार एसोसिएशन की पूर्व अध्यक्ष सुषमा गुप्ता, समाज सेविका सरिता तोलानी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम धार्मिक दिव्यता, आध्यात्मिक ऊर्जा और समाजिक सौहार्द की भावना के साथ संपन्न हुआ।
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