किसान संगठन (एफपीओ) बनाने का लक्ष्य 350 तक पहुंचा, 27 संस्थाएं सूचीबद्ध लेकिन नीति वित्त विभाग में लंबित
जयपुर। राजस्थान सरकार की ओर से किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें बाजार में बेहतर सामूहिक ताकत देने के उद्देश्य से 2024-25 के बजट में 500 नए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने की घोषणा की गई थी। लेकिन विधानसभा में राजसमंद विधायक दिप्ती किरण माहेश्वरी के सवाल संख्या 16/5/3406 के जवाब में इस बजट घोषणा की जमीनी स्थिति सामने आई है। सरकार के जवाब के मुताबिक राज्य योजना के तहत अब तक एक भी नया एफपीओ गठित नहीं हुआ है।
सरकार ने माना है कि राज्य एफपीओ नीति अभी प्रक्रियाधीन होने के कारण नए एफपीओ के गठन की कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी। इतना ही नहीं, मौजूदा एफपीओ के सुदृढ़ीकरण के लिए भी राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई राशि स्वीकृत, जारी या खर्च नहीं की गई है।
500 एफपीओ की घोषणा, पहले चरण में 350 का लक्ष्य
सरकार ने 500 एफपीओ की बजट घोषणा को अमल में लाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। 23 सितंबर 2025 को हुई समिति की पहली बैठक में पहले चरण में 350 एफपीओ बनाने का विभागवार लक्ष्य तय किया गया।
इसके बाद एफपीओ गठन में सहयोग के लिए 27 सीबीबीओ को निर्धारित मापदंडों के आधार पर सूचीबद्ध भी किया गया। हालांकि, लक्ष्य निर्धारित होने और संस्थाओं के सूचीबद्ध होने के बावजूद राज्य योजना के तहत एक भी नया एफपीओ अस्तित्व में नहीं आया।
नीति तैयार हुई, लेकिन वित्त विभाग में अटकी
सरकार के अनुसार राष्ट्रीय एफपीओ नीति के आधार पर राजस्थान की राज्य एफपीओ नीति का प्रारूप तैयार किया गया। सितंबर 2025 में इसे मुख्यमंत्री के अनुमोदन के लिए भेजा गया और इसके बाद परीक्षण के लिए वित्त विभाग को भेज दिया गया। इसके आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
प्रस्तावित एफपीओ नीति में व्यवसाय योजना, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क, वित्तीय समावेशन, तकनीकी सहायता, इक्विटी अनुदान, कार्यशील पूंजी ऋण पर ब्याज सहायता और ऋण गारंटी जैसे प्रावधान शामिल हैं। नीति लागू नहीं होने के कारण इन सुविधाओं का लाभ राज्य योजना के तहत किसानों तक नहीं पहुंच पाया है।
राजस्थान में 913 एफपीओ, लेकिन राज्य योजना में संख्या शून्य
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राजस्थान के 362 ब्लॉकों में 913 एफपीओ कार्यरत हैं। इनमें 589 एफपीओ केंद्र सरकार की 10 हजार एफपीओ योजना के तहत गठित किए गए हैं। वर्ष 2024-25 और 2025-26 में केंद्र सरकार की योजना के तहत राजस्थान में 72 एफपीओ गठित किए गए।
इन 72 एफपीओ का गठन और पंजीकरण केंद्र सरकार की वित्तीय व्यवस्था के तहत हुआ है। ऐसे में इन्हें राजस्थान सरकार की 500 एफपीओ वाली बजट घोषणा की उपलब्धि के रूप में शामिल नहीं किया जा सकता। राज्य योजना के तहत नए एफपीओ की संख्या अब भी शून्य है।
630.96 करोड़ के अनुदान में एफपीओ को महज 2.64 करोड़
सरकार के जवाब में राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति-2019 से जुड़े आंकड़े भी सामने आए। इसके तहत 1,497 लाभार्थियों को प्रसंस्करण इकाइयों के लिए कुल 630.96 करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया। इनमें एफपीओ को केवल 2.64 करोड़ रुपये मिले, जो कुल स्वीकृत राशि का करीब 0.4 प्रतिशत है।
इससे राज्य में एफपीओ के लिए वित्तीय सहायता और उन्हें मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
किसानों को अब घोषणा नहीं, अमल का इंतजार
एफपीओ किसानों को सामूहिक रूप से अपनी उपज बेचने, प्रसंस्करण कराने, बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और सौदेबाजी की क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। ऐसे में 500 एफपीओ बनाने की घोषणा के बावजूद राज्य योजना में अब तक एक भी एफपीओ नहीं बनने का मुद्दा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधायक दिप्ती किरण माहेश्वरी के सवाल के जवाब के बाद अब सरकार के सामने कई सवाल हैं। 500 एफपीओ कब बनेंगे? पहले चरण में निर्धारित 350 एफपीओ का लक्ष्य कब पूरा होगा? वित्त विभाग में लंबित नीति को कब मंजूरी मिलेगी? 27 सूचीबद्ध सीबीबीओ को काम कब मिलेगा और एफपीओ के लिए बजट कब जारी किया जाएगा?
बजट में 500 का वादा, पहले चरण में 350 का लक्ष्य, 27 संस्थाएं सूचीबद्ध और जमीन पर शून्य गठन—अब किसानों को नई घोषणा नहीं, पुरानी घोषणा के अमल और उसका हिसाब चाहिए।
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