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    सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने से जीवन में मिलेगी सफलता: संत हरिनाथ महाराज

    शामदा हरिनाथ बगीची में संत ने आत्मनिरीक्षण, सदाचार और प्रेमपूर्ण भक्ति का दिया संदेश

    सोडावास। सोडावास के समीप शामदा हरिनाथ बगीची (बाबा गरीब नाथ आश्रम) के संस्थापक संत हरिनाथ महाराज ने कहा कि मनुष्य को सदैव सत्य बोलना चाहिए और धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपने जीवन को श्रेष्ठ, मर्यादित और समाज के लिए कल्याणकारी बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के आचरण, व्यवहार और कर्म ऐसे होने चाहिए, जिनसे किसी को उस पर उंगली उठाने का अवसर न मिले।

    श्रद्धालुओं को सत्य, धर्म, सदाचार और भक्ति का संदेश देते संत हरिनाथ महाराज
    श्रद्धालुओं को सत्य, धर्म, सदाचार और भक्ति का संदेश देते संत हरिनाथ महाराज

    दूसरों में दोष देखने से पहले करें आत्मनिरीक्षण

    संत हरिनाथ महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपनी गलतियों और बुराइयों को समझकर उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए। दूसरों पर मिथ्या दोषारोपण करने से बेहतर है कि व्यक्ति स्वयं आत्मनिरीक्षण करे। कई बार मनुष्य अपनी गलतियों के कारण स्वयं के पतन का रास्ता तैयार करता है, लेकिन दोष दूसरों पर डाल देता है।

    उन्होंने कहा कि दूसरों में दोष खोजने के कारण व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद कमियां दिखाई नहीं देतीं। आंखें सबको देख सकती हैं, लेकिन स्वयं को नहीं देख पातीं। निष्पक्ष, शांत और एकाग्रचित होकर आत्मा की आवाज सुनने से व्यक्ति को अपने वास्तविक स्वरूप का बोध होता है।

    किसी को दुख और कष्ट नहीं पहुंचाएं

    महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में ऐसी अच्छाइयों को अपनाना चाहिए, जो उसे श्रेष्ठ और मर्यादित बनाएं। जहां से भी अच्छी सीख मिले, उसे ग्रहण कर अपने जीवन को समाज के कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार से दुख, भय या क्लेश नहीं पहुंचाना चाहिए। न ही किसी को ऐसा करने की प्रेरणा देनी चाहिए और न ही ऐसी इच्छा रखनी चाहिए। मनुष्य को सदैव सत्य स्वरूप परमात्मा की शरण में रहकर उनके कृपा पात्र बनने का प्रयास करना चाहिए।

    प्रेमपूर्ण भक्ति से प्रसन्न होते हैं परमात्मा

    संत हरिनाथ महाराज ने कहा कि प्रेमपूर्वक की गई भक्ति से परमात्मा प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा करते हैं। उन्होंने आत्मा और परमात्मा के संबंध की व्याख्या करते हुए कहा कि परमात्मा सृष्टि के कण-कण में विद्यमान हैं। आत्मा का परमात्मा से गहरा संबंध है और परमात्मा के बिना आत्मा का अस्तित्व संभव नहीं है।

    उन्होंने कहा कि परमात्मा के लिए ऊंच-नीच और जाति-पाति का कोई भेदभाव नहीं है। उनके लिए प्रेमपूर्ण भक्ति ही सर्वोपरि है। भक्तिहीन जीवन को उन्होंने बिना जल के बादल के समान बताया। उनके अनुसार, जीवन में कितनी भी विशेषताएं क्यों न हों, भक्ति और सदाचार के बिना वह अधूरा है।

    संत ने श्रद्धालुओं से सत्य, प्रेम, सदाचार और भक्ति को जीवन में अपनाने तथा समाज में सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया।

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