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    कठूमर में 11 दिवसीय श्रमण संस्कृति शिविर का समापन, बच्चों ने दी संस्कारों की परीक्षा

    जैन मंदिर में श्रमण संस्कार शिविर का समापन, अहिंसा-संयम के पाठ सीखकर बच्चों ने दिखाई प्रतिभा

    कठूमर। युगदृष्टा आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर जी महाराज की पावन प्रेरणा से श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, कठूमर में आयोजित 11 दिवसीय ‘श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर-2026’ का रविवार को परीक्षा एवं पुरस्कार वितरण के साथ भव्य समापन हुआ। शिविर के अंतिम दिन बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला और उन्होंने धर्म, संस्कार एवं नैतिक मूल्यों से जुड़े विषयों पर अपनी उत्कृष्ट समझ का परिचय दिया।

    शिविर में बच्चों को अहिंसा, संयम, त्याग, जीव दया, नैतिक जीवनशैली तथा जैन धर्म के मूल सिद्धांतों की व्यवहारिक शिक्षा दी गई। समापन दिवस पर शिविरार्थियों ने आतिश्य लकी जैन एवं विधी जैन के मार्गदर्शन में परीक्षा दी, जिसमें बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। इस अवसर पर महिला मंडल की सदस्य पूनम जैन एवं नेहा जैन भी उपस्थित रहीं।

    शिविर अध्यक्ष इंदिरा जैन ने बताया कि 28 मई से प्रारंभ हुए इस संस्कार शिविर का संचालन शिविर प्रभारी सोनेश जैन तथा संयोजक वर्षा जैन, विधी जैन और आतिश्य लकी जैन के निर्देशन में किया गया। प्रतिदिन शिविर का शुभारंभ मंगलाचरण, भक्तामर स्तोत्र पाठ एवं णमोकार महामंत्र के जाप से होता था, जिससे बच्चों में आध्यात्मिक वातावरण के प्रति रुचि विकसित हुई।

    संस्कारों के साथ व्यक्तित्व विकास पर भी रहा जोर

    शिविर के दौरान बच्चों को रात्रि भोजन त्याग, छना हुआ पानी पीने, जीवों के प्रति करुणा रखने तथा अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा दी गई। इसके साथ ही जैन संस्कृति, तीर्थंकरों के जीवन चरित्र एवं धार्मिक परंपराओं की जानकारी भी दी गई।

    बालक-बालिकाओं ने सामूहिक रूप से णमोकार मंत्र का सस्वर उच्चारण कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। शिविर में आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में बच्चों ने जैन धर्म, तीर्थंकरों और धार्मिक इतिहास से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

    30 बच्चों ने लिया नियमित प्रशिक्षण

    शिविर अध्यक्ष मुकेश जैन ने बताया कि शिविर में 30 बच्चों की नियमित उपस्थिति रही। सभी बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने कहा कि शिविर के दौरान प्राप्त संस्कार अब बच्चों के व्यवहार और दिनचर्या में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जो शिविर की सबसे बड़ी सफलता है।

    समापन समारोह में उपस्थित अभिभावकों एवं समाजजनों ने इस प्रकार के संस्कार शिविरों को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए आयोजन की सराहना की। सभी ने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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