श्रमण संस्कृति शिक्षण कार्यक्रम शिविर में धर्म, संयम और पूजा पद्धति की दी गई जानकारी
कठूमर। श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, कठूमर में आयोजित 11 दिवसीय ‘श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर-2026’ के दूसरे दिन शुक्रवार को बच्चों में विशेष उत्साह और उमंग देखने को मिली। शिविर में बाल प्रतिभागियों ने धर्म, संस्कार और जैन संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
शिविर प्रभारी सोनेश जैन एवं संयोजक वर्षा जैन, विधी जैन और आतिश्य लकी जैन के निर्देशन में कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः मंगल पाठ और अरिहंत भक्ति के साथ किया गया।
विद्वत् पंडित सोनेश जैन ने बच्चों को पंच परमेष्ठी के स्वरूप, णमोकार मंत्र के महत्व और उसके शुद्ध उच्चारण का अभ्यास कराया। साथ ही जैन पूजा पद्धति की प्रारंभिक जानकारी भी दी गई।
शिविर में आयोजित संस्कार सत्र के दौरान बच्चों को प्रातः जल्दी उठने, गुरुजनों का सम्मान करने, जीव दया, सत्य और संयम जैसे जीवन मूल्यों के संस्कार दिए गए।
प्रायोगिक प्रशिक्षण में बच्चों को पूजन की थाली सजाने, सामग्री के क्रम और अर्घ समर्पित करने की विधि का अभ्यास कराया गया। वहीं कहानी सत्र में भगवान महावीर स्वामी के बचपन के प्रसंगों के माध्यम से अहिंसा, करुणा और त्याग का संदेश दिया गया।
खेल-खेल में ज्ञान गतिविधि के तहत जैन धर्म से जुड़ी प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पुरस्कार प्राप्त किए।
महिला अध्यक्ष इंदिरा जैन ने बताया कि शिविर के दूसरे दिन 25 से अधिक बच्चों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि बच्चों में धर्म और संस्कारों के प्रति बढ़ती जिज्ञासा और सीखने की ललक प्रेरणादायी है।
कार्यक्रम के दौरान व्यवस्था में विजयपाल जैन, पारस जैन, जितेंद्र जैन, शीतल जैन, शिप्रा जैन, पूनम जैन और मंजू जैन का विशेष सहयोग रहा। वहीं शिविरार्थियों के लिए अल्पाहार की व्यवस्था विजयपाल-मालती जैन एवं शिप्रा जैन परिवार की ओर से की गई।
आयोजकों ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को नियमित रूप से शिविर में भेजें, ताकि वे श्रमण संस्कृति और संस्कारों से ओत-प्रोत हो सकें।
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