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    Homeदेशकर्नाटक में सम्मानित हुए जलपुरुष राजेंद्र सिंह, “बसवन्ना सम्मान” से नवाजे गए

    कर्नाटक में सम्मानित हुए जलपुरुष राजेंद्र सिंह, “बसवन्ना सम्मान” से नवाजे गए

    जलपुरुष राजेंद्र सिंह के नदी संरक्षण कार्यों की सराहना, इचनहल्ला नदी पुनर्जीवन अभियान को मिली पहचान

    गदग। प्रकृति संरक्षण और जल संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले जलपुरुष राजेंद्र सिंह को कर्नाटक के गदग स्थित तोंदेट मठ में “बसवन्ना सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रतिभा प्रकृति प्रतिष्ठान द्वारा कर्नाटक सरकार के संसदीय मंत्री एच.के. पटेल की उपस्थिति में प्रदान किया गया।

    यह सम्मान उन प्रकृति संरक्षकों को दिया जाता है, जिन्होंने जीवनभर प्रकृति बचाने के लिए रचनात्मक कार्य और संघर्ष किए हों। जलपुरुष राजेंद्र सिंह पिछले 30 वर्षों से गदग जिले की इचनहल्ला नदी को पुनर्जीवित करने के अभियान से जुड़े हुए हैं। उनके प्रयासों से यह नदी आज भी शुद्ध और सदानीरा रूप में प्रवाहित हो रही है।

    राजेंद्र सिंह ने 26 मई 2026 को इचनहल्ला नदी का भ्रमण कर इसकी वर्तमान स्थिति का अवलोकन किया। यह नदी नावा-नागावी गांव से शुरू होकर असुंडी और हरसी होते हुए महासागर में मिलती है। पिछले कई वर्षों के अकाल के बावजूद नदी के दोनों किनारे हरे-भरे और जलयुक्त बने हुए हैं।

    सम्मान समारोह में वक्ताओं ने जलपुरुष के कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। जे.के. जमादार ने कहा कि राजेंद्र सिंह ने केवल नदी संरक्षण की बात ही नहीं की, बल्कि उसे धरातल पर सफलतापूर्वक लागू कर दिखाया है। वहीं डी.आर. पटेल ने उन्हें प्रकृति और संस्कृति का संत बताते हुए कहा कि वे जीवनभर जल, जंगल, पहाड़ और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित रहे हैं।

    इस अवसर पर कई विधायक, मंत्री और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने जलपुरुष के प्रयासों को प्रेरणादायी बताया।

    सम्मान स्वीकार करते हुए राजेंद्र सिंह ने कहा कि जिन लोगों के साथ मिलकर काम किया हो, उन्हीं लोगों द्वारा सम्मानित किया जाना सबसे बड़ा सम्मान होता है। उन्होंने कहा कि इचनहल्ला नदी पर वर्षों से चल रहे कार्यों का सकारात्मक परिणाम देखकर उन्हें भावनात्मक संतोष मिल रहा है।

    कार्यक्रम के अंत में संसदीय मंत्री एच.के. पटेल ने नदी-पहाड़ बचाओ कानून बनाने की दिशा में कार्य शुरू करने की बात कही। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 252 के तहत इस अभियान को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे और विभिन्न राज्यों को भी इससे जोड़ा जाएगा।

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