जांच के दायरे में अस्पताल, किडनी ट्रांसप्लांट नेटवर्क पर पुलिस की सख्त कार्रवाई तेज
कानपुर। शहर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद अस्पतालों और नर्सिंगहोम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अब पिछले तीन वर्षों में हुई संदिग्ध मौतों और विवादों की गहन जांच में जुट गई है। पुलिस के अनुसार कल्याणपुर, काकादेव, रावतपुर, पनकी, सचेंडी और मसवानपुर क्षेत्रों के उन नर्सिंगहोम की डिटेल जुटाई जा रही है, जहां बीते वर्षों में मरीजों की मौत के बाद हंगामा हुआ था। इन मामलों में मृत मरीजों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि मृतकों में कुछ मरीज किडनी डोनर या रिसीवर हो सकते हैं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस एंगल को गंभीरता से खंगाल रही है। कुछ नर्सिंगहोम के खिलाफ पहले भी कार्रवाई कर उन्हें सीज किया गया था, लेकिन कुछ समय बाद वे दोबारा संचालित होने लगे। अब पुलिस उन सभी संस्थानों की भूमिका की फिर से जांच कर रही है।
मामले में फरार आरोपी नवीन पांडेय और शिवम यादव की तलाश में पुलिस की टीमें हरदोई और प्रयागराज रवाना की गई हैं। बताया जा रहा है कि ये दोनों ट्रांसप्लांट नेटवर्क के अहम कड़ी हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि किडनी डोनर अलग-अलग शहरों से लाए जाते थे और उन्हें दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में ले जाया जाता था। वहां पूरे नेटवर्क के जरिए अवैध ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की जाती थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पैरामेडिकल स्टाफ को असली ऑपरेशन की जानकारी नहीं दी जाती थी। मरीजों को गॉल ब्लैडर, हर्निया या अन्य बीमारी का हवाला देकर भर्ती कराया जाता था, जबकि अंदर ही अंदर अवैध सर्जरी की जाती थी।
पुलिस अब मुख्य आरोपियों शिवम अग्रवाल और रोहित तिवारी का कस्टडी रिमांड लेने की तैयारी कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें। इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, जिनमें डॉक्टर और अन्य सहयोगी शामिल हैं। वहीं कई डॉक्टर और आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
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