मार्क्सवाद की प्रासंगिकता पर परिचर्चा, जयंती पर आयोजन
जयपुर। महान दार्शनिक कार्ल मार्क्स की जयंती के अवसर पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) द्वारा जयपुर में स्मृति सभा और चर्चा-परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वर्तमान परिस्थितियों में मार्क्सवाद की प्रासंगिकता पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्टी के वरिष्ठ नेता का. रवीन्द्र शुक्ला ने की। इस दौरान वक्ताओं ने मार्क्सवादी विचारधारा के ऐतिहासिक और वर्तमान महत्व पर अपने विचार रखे।
परिचर्चा में भाग लेते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में भी मार्क्सवाद की प्रासंगिकता बनी हुई है। उन्होंने बताया कि मार्क्सवाद शोषण के खिलाफ संघर्ष और समानता आधारित समाज की स्थापना की विचारधारा है, जो आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी पहले थी।
वक्ताओं ने बताया कि कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई 1818 को जर्मनी के ट्रियर शहर में हुआ था। वे विश्व के महानतम दार्शनिकों में से एक थे, जिन्होंने समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने 1848 में प्रसिद्ध कम्युनिस्ट घोषणा-पत्र लिखा, जिसने पूंजीवादी व्यवस्था को चुनौती देते हुए दुनिया भर में एक नई विचारधारा को जन्म दिया। मार्क्स ने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन शोषणमुक्त समाज के लिए संघर्ष जारी रखा।
वक्ताओं ने कहा कि कार्ल मार्क्स के विचारों ने दुनिया भर में श्रमिक वर्ग को संगठित किया और कई देशों को उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद और पूंजीवाद के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा दी। उनका योगदान आज भी राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों में देखा जा सकता है।
कार्यक्रम में Communist Party of India (Marxist) के राज्य सचिव का. किशन पारीक, राज्य सचिव मंडल सदस्य का. सुमित्रा चोपड़ा, जिला सचिव डॉ. संजय “माधव”, का. सुरेश कश्यप, नीरज महला और का. रवीन्द्र शुक्ला ने अपने विचार व्यक्त किए।
इस आयोजन के माध्यम से मार्क्सवादी विचारधारा के सिद्धांतों और उनकी वर्तमान समय में उपयोगिता पर गहन चर्चा की गई।
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