आयोग की बैठक में समर्थन मूल्य पर गारंटी की मांग दोहराई
नई दिल्ली। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने की सार्थकता तभी है जब उसकी प्राप्ति सुनिश्चित हो और इसके लिए खरीद की कानूनी गारंटी अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा गठित समिति के उपसमूह ने 21 अप्रैल 2023 को खरीद की गारंटी संबंधी कानून बनाने की अनुशंसा की थी, लेकिन तीन वर्ष पूरे होने को हैं और इस पर अभी तक ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
रामपाल जाट ने कहा कि वर्ष 1968 से सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती आ रही है और संसद में भी कई बार किसानों को घोषित मूल्य से कम दाम पर उपज बेचने के लिए विवश नहीं होने देने का आश्वासन दिया गया है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार व्यापारिक समझौतों के तहत विदेशी बाजारों के लिए तत्पर दिखाई देती है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठा रही है।
यह विचार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग द्वारा किसान संगठनों के साथ संवाद हेतु आयोजित बैठक में रखे गए। बैठक की अध्यक्षता आयोग के चेयरमैन प्रोफेसर विजय पाल शर्मा ने की।
बैठक में शासकीय सदस्य डॉ. प्रेमचंद, गैर शासकीय सदस्य रतनलाल डागा सहित आयोग के विभिन्न अधिकारी उपस्थित रहे। किसान संगठनों की ओर से अखिल भारतीय किसान सभा, भारतीय एग्रो इकोनॉमिक्स रिसर्च सेंटर, सीफा, पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन एवं किसान महापंचायत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक का आयोजन डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में किया गया।
रामपाल जाट ने पिछले 60 वर्षों में आयोग द्वारा की गई किसान हितैषी अनुशंसाओं की पालना की समीक्षा सार्वजनिक करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि आयात-निर्यात नीति को किसान हितों के अनुरूप बनाना समय की आवश्यकता है।
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