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    कुटीर हरित कोष के वृक्षारोपण अभियान से रावण देवरा में जागी पर्यावरण चेतना

    “कुटीर हरित कोष” वृक्षारोपण अभियान: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक ग्राम रावण देवरा में अनूठा प्रयास

    मिशनसच न्यूज, अलवर।  पर्यावरण संरक्षण को समर्पित सामाजिक पहल “कुटीर हरित कोष” के तत्वावधान में एक विशेष वृक्षारोपण (पौधरोपण) कार्यक्रम का आयोजन कल प्रातः 8.00 बजे किया जाएगा। यह कार्यक्रम भामाशाह जी की ऐतिहासिक बावड़ी के समीप, राजर्षि ग्राम रावण देवरा में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और विद्वानों की सहभागिता की संभावना है।

    इस आयोजन का संयोजन पर्यावरणविद प्रोफेसर डॉ. एम.पी.एस. चंद्रावत द्वारा किया जा रहा है, जो वर्षों से हरित अभियान और सांस्कृतिक संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस आयोजन को स्थानीय लोगों द्वारा विशेष रूप से सराहा जा रहा है, क्योंकि यह न केवल पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा देता है, बल्कि ग्राम की ऐतिहासिक विरासत को भी उजागर करता है।

    रावण देवरा: एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर

    ग्राम रावण देवरा का इतिहास केवल भामाशाह से ही नहीं जुड़ा, बल्कि ऐसा कहा जाता है कि रावण स्वयं अपने जीवनकाल में अलवर पधारे थे और उन्होंने यहां जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की पूजा की थी। यह भी मान्यता है कि जिस प्रतिमा की पूजा रावण ने की थी, वह आज भी अलवर शहर के बीरबल का मोहल्ला स्थित श्वेतांबर जैन मंदिर में स्थापित है।

    इसके अलावा, यह स्थान राष्ट्रभक्त भामाशाह के ऐतिहासिक योगदान के लिए भी प्रसिद्ध है, जिन्होंने इस ग्राम में अपने निजी धन से बावड़ी का निर्माण करवाया था। यह बावड़ी आज भी एकदम सुरक्षित और संरक्षित स्थिति में है, जो इस ग्राम के वैभव और परंपरा का प्रतीक है।

    “कुटीर हरित कोष”: हरियाली का संकल्प

    “कुटीर हरित कोष” एक गैर-सरकारी, स्वप्रेरित पर्यावरणीय अभियान है जिसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना और जनमानस को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना है। इस बार ग्राम रावण देवरा को चयनित करना, न केवल हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है, बल्कि ग्रामीणों को उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव से जोड़ने का प्रयास भी है।

    डॉ. एम.पी.एस. चंद्रावत ने बताया कि, “हमारा उद्देश्य सिर्फ पेड़ लगाना नहीं, बल्कि एक चेतना का निर्माण करना है — ऐसी चेतना जो भावी पीढ़ियों को हरियाली की ओर अग्रसर करे।”

    स्थानीय सहभागिता और जन जागरूकता

    इस आयोजन में न केवल स्थानीय ग्रामीणों को आमंत्रित किया गया है, बल्कि पास के स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया गया है। कार्यक्रम के दौरान पौधरोपण के साथ-साथ पर्यावरण पर आधारित जागरूकता भाषण, पौधों का महत्व और उनके संरक्षण के तरीकों पर भी चर्चा की जाएगी।

    भविष्य की दिशा

    इस वृक्षारोपण कार्यक्रम के माध्यम से “कुटीर हरित कोष” एक संदेश देना चाहता है कि — “हर वृक्ष सिर्फ ऑक्सीजन नहीं देता, वह भविष्य का निर्माण करता है।” ग्राम रावण देवरा, अपने ऐतिहासिक गौरव और सांस्कृतिक समृद्धि के साथ अब हरित क्रांति का वाहक भी बन रहा है।

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