राजस्थान के अनुलेखक (LDC) अभ्यर्थियों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को ज्ञापन सौंपकर नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की मांग की। परीक्षा परिणाम जारी हुए महीनों बीत गए हैं, लेकिन दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।
मिशनसच न्यूज, अलवर। राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को अनुलेखक (LDC) पद के अभ्यर्थियों ने ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों ने ज्ञापन में नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही अनावश्यक देरी पर गहरी नाराज़गी व्यक्त करते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
अभ्यर्थियों ने बताया कि 25 सितंबर 2025 को अनुलेखक पद की परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम जारी हुए कई माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो दस्तावेज़ सत्यापन शुरू हुआ और न ही नियुक्ति आदेश जारी किए गए हैं। इससे हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
ज्ञापन में यह स्पष्ट रूप से कहा गया कि परिणाम घोषित होने के बाद से विभागीय स्तर पर लगातार चुप्पी बनी हुई है, और अभ्यर्थियों को केवल आश्वासन ही मिल रहा है। कई बार राज्य कार्मिक विभाग और परीक्षा आयोजन संस्था से संपर्क करने पर भी कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
अभ्यर्थियों ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में देरी से वे मानसिक तनाव और आर्थिक संकट झेल रहे हैं। कई उम्मीदवारों ने बताया कि वे वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, परंतु लम्बी प्रशासनिक प्रक्रिया ने उनके धैर्य और आत्मविश्वास दोनों को कमजोर कर दिया है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि राजस्थान सरकार शीघ्र दस्तावेज़ सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे, ताकि चयनित अभ्यर्थियों को राहत मिल सके।
ज्ञापन पर अंशुल शर्मा, गोविंद सिंह मीणा, हेमंत चौधरी, रवि शर्मा, अशरफ, दीपक सहित अनेक अभ्यर्थियों के हस्ताक्षर किए गए। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाएंगे और अपने अधिकारों की आवाज बुलंद करेंगे।
अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि बेरोजगारी की समस्या लगातार बढ़ रही है, और यदि चयन के बाद भी नियुक्ति नहीं मिलती तो यह युवाओं के साथ अन्याय है। “सरकार ने युवाओं से रोजगार देने का वादा किया था, परंतु चयन के बावजूद नौकरी न मिलना सबसे बड़ा विरोधाभास है।”
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अभ्यर्थियों की समस्याएं ध्यानपूर्वक सुनीं और आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को राजस्थान सरकार के समक्ष उचित स्तर पर उठाएंगे। उन्होंने कहा कि “युवा देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं, और उनकी मेहनत एवं प्रतीक्षा का सम्मान होना चाहिए।”
राज्यस्तरीय कार्यक्रम के इस अवसर पर अनेक विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे। भूपेंद्र यादव ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि चयन प्रक्रिया में देरी से युवाओं का भविष्य प्रभावित न हो।
इस ज्ञापन के माध्यम से अभ्यर्थियों ने सरकार से एक स्पष्ट और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है। युवाओं का कहना है कि वे किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपने अधिकार और भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
राजस्थान के युवाओं में यह मुद्दा अब रोजगार न्याय आंदोलन का रूप लेने लगा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो वे सोशल मीडिया और ज़मीनी स्तर पर अभियान चलाकर इस विषय को व्यापक जनसमर्थन के साथ उठाएंगे।

