रामलीला में सीता की खोज से लेकर लंका-दहन तक के प्रसंगों ने बांधा समां, हनुमान और रावण के संवादों ने बढ़ाया रोमांच
कोटकासिम। श्री रामलीला कमेटी कोटकासिम की ओर से खुले मैदान में दिन के समय आयोजित होने वाली रामलीला में शनिवार को ग्यारहवें दिन सीता सुधि और लंका-दहन प्रसंग का दर्शनीय मंचन किया गया। नरेंद्र सोनी (लादू) की अध्यक्षता और चतुर्भुज शर्मा के निर्देशन में कलाकारों ने रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। मीडिया प्रभारी योगेश अग्रवाल ने बताया कि मंचन के दौरान दर्शकों ने हनुमानजी के पराक्रम और भक्ति से जुड़े दृश्यों का आनंद लिया।
जामवंत ने याद दिलाई हनुमान को शक्ति
सीता माता की खोज में हनुमान, जामवंत और अंगद सहित वानर सेना दक्षिण दिशा की ओर रवाना हुई। खोजते-खोजते सभी विशाल समुद्र के किनारे पहुंच गए, लेकिन आगे जाने का मार्ग नहीं मिलने पर निराश हो गए। इस दौरान जामवंत ने हनुमानजी को उनकी भूली हुई शक्ति का स्मरण कराया। इसके बाद हनुमानजी ने सौ योजन का समुद्र लांघकर लंका में प्रवेश किया और अशोक वाटिका में सीता माता को खोज लिया।
हनुमानजी ने सीता माता को विश्वास दिलाया कि भगवान श्रीराम शीघ्र ही सेना सहित लंका पहुंचेंगे और उन्हें वहां से मुक्त कराकर ले जाएंगे।
हनुमान-रावण संवाद के बाद हुआ लंका-दहन
इसके बाद मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर हनुमानजी को बंदी बना लिया और रावण के दरबार में ले गया। वहां हनुमानजी और रावण के बीच तीखी बहस हुई। हनुमानजी की ललकार से क्रोधित रावण ने उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया। इसके बाद हनुमानजी ने अपनी जलती पूंछ से लंका में आग लगा दी। लंका-दहन के इस प्रसंग का प्रभावशाली मंचन किया गया।
लीला के अगले दृश्य में हनुमानजी सीता माता से उनकी चूड़ामणि लेकर लौटे और भगवान श्रीराम को सीता माता की स्थिति तथा लंका के घटनाक्रम की जानकारी दी।
कलाकारों ने निभाईं महत्वपूर्ण भूमिकाएं
रामलीला के मंचन में रवि सैनी ने भगवान श्रीराम, संजय शर्मा ने सीता, विशेष अग्रवाल ने लक्ष्मण, गिरीश भारद्वाज ने हनुमान, योगेश अग्रवाल ने संपाती गिद्ध, राजेश सोनी ने सुग्रीव और उत्तम कौशिक ने जामवंत की भूमिका निभाई।
इसी तरह दिनेश सैनी ने रावण, रविन्द्र मिश्रा ने मंदोदरी, अमित भारद्वाज ने विभीषण, सुरभित ने मेघनाद, इशांत बाघोरिया ने अक्षय कुमार और राधा गुप्ता ने त्रिजटा का अभिनय किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों से रामलीला के प्रमुख प्रसंग मंच पर सजीव हो उठे।
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