स्वास्थ्य मामलों में एआई सलाह पर सवाल, मेडिकल विशेषज्ञों ने बताया जोखिम भरा ट्रेंड
नई दिल्ली। डिजिटल युग में लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इंटरनेट का सहारा ले रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि एआई आधारित चैटबॉट्स पर मेडिकल सलाह के लिए निर्भरता कई बार भारी पड़ सकती है।
हाल ही में British Medical Journal (BMJ) में प्रकाशित एक शोध में यह खुलासा हुआ है कि एआई चैटबॉट्स लगभग 50% से अधिक मामलों में गलत या भ्रामक मेडिकल जानकारी दे सकते हैं। यह स्थिति खासतौर पर तब खतरनाक हो जाती है जब लोग बिना डॉक्टर की सलाह के इन जानकारियों के आधार पर उपचार शुरू कर देते हैं।
शोध के दौरान पांच लोकप्रिय एआई चैटबॉट्स से कैंसर, वैक्सीन, पोषण और स्टेम सेल जैसे संवेदनशील विषयों पर सवाल पूछे गए। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ गलत जानकारी का सीधा असर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। अध्ययन में पाया गया कि आधे से ज्यादा मामलों में एआई के जवाब “समस्याग्रस्त” थे और वे यूजर्स को गलत दिशा में ले जा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, एआई सिस्टम अक्सर अपने प्रशिक्षण डेटा और यूजर के सवाल पूछने के तरीके (प्रॉम्प्ट) के आधार पर जवाब देता है। कई बार यह यूजर की मान्यताओं से मेल खाने वाले उत्तर देने लगता है, भले ही वे पूरी तरह सही न हों। यही कारण है कि एआई के जवाब सुनने में भले ही डॉक्टर जैसे लगें, लेकिन उनमें तकनीकी त्रुटियां होने की संभावना अधिक रहती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि एआई का उपयोग केवल सामान्य जानकारी प्राप्त करने तक सीमित रखना चाहिए। किसी भी बीमारी, टेस्ट रिपोर्ट या दवा से जुड़ा अंतिम निर्णय हमेशा योग्य डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए। गलत जानकारी के आधार पर इलाज करने से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह जरूरी है कि लोग जागरूक रहें और अपनी सेहत से जुड़े मामलों में सतर्कता बरतें। एआई एक सहायक उपकरण हो सकता है, लेकिन यह डॉक्टर का विकल्प नहीं बन सकता।
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