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    खैरथल में दिव्यांगजन पुनर्वास कार्यक्रम की शुरुआत

    खैरथल में कौशल्यम इंस्टीट्यूट ने दिव्यांगजन पुनर्वास कार्यक्रम शुरू किया। प्रभाकर शर्मा बोले– सहानुभूति नहीं, आत्मनिर्भरता जरूरी।

    खैरथल, 17 जुलाई। कौशल्यम इंस्टीट्यूट, खैरथल द्वारा दिव्यांगजनों के लिए एक सकारात्मक पहल करते हुए “सामुदायिक पुनर्वास कार्यक्रम” की शुरुआत की गई है। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर वक्ता प्रभाकर शर्मा ने कहा कि “दिव्यांगजनों को दया, करुणा या सहानुभूति की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और मजबूत बनने में सहायता की आवश्यकता है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समाज दिव्यांगजनों को केवल दया और सहानुभूति की दृष्टि से देखेगा, तो वे कभी आत्मनिर्भर नहीं बन पाएंगे। इसके विपरीत, यदि उन्हें समाज की मुख्यधारा में आत्मसम्मान के साथ स्थान दिया जाए और उन्हें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य तथा सामाजिक सुरक्षा में समान अवसर मिलें, तो वे भी समाज के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    चार हिस्सों में होगा खैरथल का पुनर्वास सर्वेक्षण:

    कार्यक्रम संयोजक देवेंद्र शर्मा ने जानकारी दी कि संस्थान के द्वितीय वर्ष के डिप्लोमा प्रशिक्षणार्थी इस सामुदायिक पुनर्वास कार्यक्रम को क्रियान्वित करेंगे। इसके लिए खैरथल नगर परिषद क्षेत्र को चार भागों में बाँटकर चरणबद्ध रूप से कार्य किया जाएगा।

    प्रत्येक क्षेत्र में प्रशिक्षणार्थी टीम द्वारा निम्नलिखित गतिविधियाँ की जाएंगी:

    • क्षेत्र में रहने वाले दिव्यांगजन बच्चों का चिन्हीकरण

    • उनकी सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य स्थितियों का सर्वेक्षण

    • उन्हें अब तक मिली या वंचित सुविधाओं की पहचान

    • उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी देना

    • आवश्यकतानुसार नवीन पुनर्वास रणनीति तैयार करना

    यह प्रयास न केवल प्रशिक्षणार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेगा बल्कि खैरथल क्षेत्र में दिव्यांग समुदाय को भी बेहतर सहायता और नीति-संवाद के ज़रिये सशक्त किया जा सकेगा।

    उद्देश्य: सहायक नहीं, सशक्त नागरिक बनाना

    इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य दिव्यांगजन को केवल सहायता का पात्र मानने की सोच से हटकर उन्हें सशक्त नागरिक के रूप में स्थापित करना है। कौशल्यम इंस्टीट्यूट का मानना है कि प्रशिक्षण से जुड़े युवा अगर समाज के सबसे वंचित वर्गों के लिए योजना बनाना और काम करना सीखें, तो वे भविष्य में बेहतर पेशेवर और समाजसेवी बन सकते हैं।

    विशेष बच्चों की उपस्थिति बनी प्रेरणा:

    कार्यक्रम में संस्थान के कई विशेष बच्चे भी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से सभी को यह संदेश दिया कि दिव्यांगता किसी की क्षमता को सीमित नहीं कर सकती। इनमें से कई बच्चे शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

    इस अवसर पर शिक्षकों, समाजसेवियों और नगर परिषद से जुड़े अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और संस्थान की इस पहल की सराहना की।

     भविष्य की दिशा:

    कौशल्यम इंस्टीट्यूट इस पुनर्वास कार्यक्रम के बाद एक समेकित रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे नगर परिषद और जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा। यह रिपोर्ट नीतिगत हस्तक्षेप और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मददगार सिद्ध हो सकती है।

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