अलवर में गुरु पूर्णिमा पर्व पर सौम्य सागर महाराज बोले— गुरु के सिद्धांतों को जीवन में उतारना ही सच्ची गुरु भक्ति
अलवर। गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व बुधवार को अलवर शहर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर गुरु पूजन, प्रवचन और आराधना के कार्यक्रम आयोजित हुए। स्कीम नंबर-10 स्थित जैन भवन में चातुर्मास पर ससंघ विराजमान समाधिस्थ दिगम्बर जैनाचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री सौम्य सागर महाराज के सानिध्य में भव्य गुरु पूर्णिमा महोत्सव आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरु भक्ति कर आचार्य विद्यासागर महाराज की पूजा-अर्चना की तथा अर्घ्य समर्पित किए।
जैन पत्रकार महासंघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य विद्यासागर ज्ञान सर्वोदय पाठशाला की अध्यापिकाओं एवं विद्यार्थियों द्वारा बैण्ड वादन और जयकारों के साथ मुनि श्री सौम्य सागर महाराज की अगवानी से हुआ। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक गुरु वंदना करते हुए उन्हें मंच तक पहुंचाया।
कार्यक्रम के दौरान शास्त्र भेंट, पाद प्रक्षालन, दीप प्रज्ज्वलन एवं गुरु पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। श्रद्धालु पूजा सामग्री से सुसज्जित थालियां लेकर जिनेन्द्र भक्ति करते हुए मंच तक पहुंचे और मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित किए। पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।
गुरु के सिद्धांतों को जीवन में उतारना ही सच्ची आराधना : सौम्य सागर महाराज
अपने प्रेरक प्रवचन में मुनि श्री सौम्य सागर महाराज ने आचार्य विद्यासागर महाराज की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है। गुरु के उपकारों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पानी जिस पात्र में रखा जाता है, उसी का आकार ग्रहण कर लेता है, उसी प्रकार शिष्य को भी अपने गुरु के आचरण, संस्कार और सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। यही सच्ची गुरु भक्ति और वास्तविक आराधना है।
उन्होंने कहा कि केवल पूजा-अर्चना करने से नहीं, बल्कि गुरु द्वारा बताए गए सत्य, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने से जीवन सार्थक बनता है।
बाहर से भी पहुंचे श्रद्धालु
गुरु पूर्णिमा महोत्सव में अलवर के अलावा आगरा, दिल्ली एवं आसपास के अनेक क्षेत्रों से भी श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने गुरु पूजा कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की और धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
अष्टान्हिका पर्व का भी हुआ समापन
इसी दिन जैन धर्मावलंबियों के पावन अष्टान्हिका पर्व का भी समापन हुआ। इस अवसर पर जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। पर्व के दौरान अनेक श्रद्धालुओं ने उपवास, संयम और धार्मिक साधना का पालन किया। अष्टान्हिका पर्व की पूर्णाहुति के साथ अब समाजजन आगामी दशलक्षण महापर्व की तैयारियों में जुट गए हैं, जो 15 सितंबर से प्रारंभ होकर 25 सितंबर तक आयोजित होंगे।
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