याचिका पर सुनवाई के दौरान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का कड़ा रुख, पर्यावरण संरक्षण के लिए तय राशि से निर्माण और वेतन भुगतान पर उठे सवाल
भीलवाड़ा। पर्यावरण संरक्षण और वायु प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर राजस्थान में वाहन चालकों से वसूले गए ग्रीन टैक्स की राशि के कथित बेजा इस्तेमाल को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। भीलवाड़ा निवासी पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू की ओर से अधिवक्ता लोकेंद्र सिंह कच्छावा के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने ग्रीन टैक्स की राशि के उपयोग को लेकर निर्देश जारी किए।
जाजू के अनुसार, पिछले करीब 10 वर्षों में राजस्थान परिवहन विभाग ने ग्रीन टैक्स के रूप में लगभग 2283.97 करोड़ रुपये एकत्र किए। उनका कहना है कि राजस्थान परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड नियम, 2012 के तहत इस राशि का उपयोग वायु प्रदूषण नियंत्रण, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों में किया जाना निर्धारित है।
निर्माण और वेतन पर खर्च का उठाया मुद्दा
याचिकाकर्ता बाबूलाल जाजू ने आरोप लगाया कि ग्रीन टैक्स से एकत्र राशि का इस्तेमाल निर्धारित पर्यावरणीय उद्देश्यों के बजाय अन्य कार्यों में किया गया। उनके अनुसार राशि से जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट और निकायों के वित्तीय घाटे को पूरा करने के साथ-साथ नालियों एवं सड़कों के निर्माण तथा कर्मचारियों और ठेकेदारों के बकाया भुगतान जैसे कार्यों में भी खर्च किया गया।
ट्रिब्यूनल ने ग्रीन टैक्स की राशि के निर्धारित उद्देश्य से इतर इस्तेमाल पर आपत्ति जताई और स्पष्ट किया कि इस फंड का उपयोग पर्यावरण एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित स्वीकृत कार्यों के लिए ही किया जाना चाहिए।
जयपुर में GRAP लागू करने के निर्देश
एनजीटी ने जयपुर शहर में वायु प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली की तर्ज पर ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सुनवाई के दौरान शहर में उड़ने वाली धूल से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गर्मियों के दौरान धूल से होने वाला प्रदूषण कुल वायु प्रदूषण में 69 प्रतिशत तक योगदान कर सकता है।
इसके लिए कच्ची सड़कों को पक्का करने और सड़कों की वैक्यूम मशीनों से सफाई जैसे उपायों पर जोर दिया गया है।
डीजल जनरेटर और वाहनों से प्रदूषण कम करने पर जोर
एनजीटी ने डीजल जनरेटर के इस्तेमाल को कम करने के लिए सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करने वाली योजनाएं तैयार करने की आवश्यकता बताई। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन और व्यावसायिक वाहनों को BS-VI, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर स्थानांतरित करने पर जोर दिया गया।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए PUC केंद्रों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई गई, ताकि वाहनों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी और नियंत्रण को प्रभावी बनाया जा सके।
ग्रीन टैक्स की राशि पर्यावरण कार्यों पर ही हो खर्च
एनजीटी के निर्देशों का मुख्य फोकस ग्रीन टैक्स से प्राप्त राशि को उसके निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप इस्तेमाल करने पर रहा। पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
याचिका में उठाए गए मुद्दों के अनुसार ग्रीन टैक्स का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण सुधार है। ऐसे में इस राशि का इस्तेमाल अन्य वित्तीय जरूरतों के बजाय पर्यावरण संबंधी स्वीकृत कार्यों में किया जाना सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
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