चंबल में अवैध खनन पर सरकार माफिया को नियंत्रण करने में असफल
नई दिल्ली। Supreme Court of India ने चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन और वन्यजीवों को हो रहे खतरे को लेकर राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सरकारों को कड़ी फटकार लगाते हुए कई सख्त निर्देश जारी किए हैं।
मामला National Chambal Gharial Sanctuary में अवैध खनन गतिविधियों से जुड़ा है, जहां लगातार हो रहे रेत खनन से पर्यावरण और घड़ियाल सहित वन्यजीवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राजस्थान सरकार की कार्रवाई पर गंभीर नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य में कार्रवाई “सिर्फ कागजों में” दिखाई दे रही है तथा सरकार “खनन माफिया पर नियंत्रण करने में पूरी तरह विफल” रही है।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
अदालत ने अवैध खनन रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इनमें चंबल क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों और अवैध खनन वाले मार्गों पर हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने, खनन वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य करने तथा अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों को तत्काल जब्त करने के आदेश शामिल हैं।
इसके अलावा कोर्ट ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को संयुक्त पेट्रोलिंग टीमें गठित करने तथा जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई “पॉल्यूटर पेज प्रिंसिपल” के तहत वसूलने की बात भी कही।
कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि बिना नंबर प्लेट के ट्रैक्टर आखिर कैसे चल रहे हैं और सीमित संसाधनों वाले होमगार्ड हथियारबंद खनन माफिया से कैसे मुकाबला करेंगे।
डीनोटिफिकेशन प्रक्रिया पर भी रोक
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट राजस्थान सरकार द्वारा चंबल अभयारण्य की 732 हेक्टेयर भूमि को डीनोटिफाई करने की प्रक्रिया पर भी रोक लगा चुका है। अदालत ने आशंका जताई थी कि यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो क्षेत्र में अवैध खनन को बढ़ावा मिल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब तीनों राज्यों पर चंबल क्षेत्र में अवैध खनन रोकने और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ गया है।
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