प्रवचन में गुणग्राही दृष्टि अपनाने का संदेश, महाराजश्री बोले—नजरिया बदलेगा तो जगत को देखने का नजरिया भी बदल जाएगा
तिजारा। भावलिंगी संत दिगंबराचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में श्रद्धालुओं को जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखने और गुणग्राही दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह जगत अच्छाइयों का गुलदस्ता है, आवश्यकता केवल उन अच्छाइयों को पहचानने और ग्रहण करने की है। व्यक्ति जैसी दृष्टि रखता है, उसे संसार भी वैसा ही दिखाई देता है।

महाराजश्री ने कहा कि यदि व्यक्ति की दृष्टि गुणग्राही है तो उसे हर जगह गुण नजर आएंगे, जबकि दोष देखने वाली दृष्टि को संसार में हर ओर कमियां दिखाई देंगी। इसलिए मनुष्य को स्वयं तय करना चाहिए कि वह अपने जीवन में फूल चुनना चाहता है या कांटे।
दृष्टिकोण बदलते ही बदल जाता है जीवन
विमर्शसागर महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में उसके दृष्टिकोण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। परिस्थितियां कई बार समान होती हैं, लेकिन उन्हें देखने वाले व्यक्ति की सोच अलग होने के कारण अनुभव भी अलग होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि संसार में कमियां खोजने के बजाय अच्छाइयों को पहचानने और उन्हें अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने से व्यक्ति के व्यवहार और विचारों में भी परिवर्तन आता है।
केवल धर्म की बातें नहीं, आचरण भी जरूरी
महाराजश्री ने कहा कि केवल धर्म की बातें करने से जीवन में धर्म के फल दिखाई नहीं देते। इसके लिए श्रद्धा, भाव और आचरण की शुद्धता आवश्यक है। सच्ची श्रद्धा और उत्तम भावों के साथ पंच परमेष्ठी की शरण ग्रहण करने से ही जीवन के वास्तविक कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने कहा कि धर्म का प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार और आचरण में दिखाई देना चाहिए। जब विचार, भाव और आचरण में सकारात्मक परिवर्तन आता है, तभी धार्मिक साधना सार्थक होती है।
अच्छाइयों को ग्रहण करने का किया आह्वान
भावलिंगी संत ने श्रद्धालुओं से अपने भावों को उत्तम बनाने और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को दूसरों में दोष खोजने की प्रवृत्ति छोड़कर गुणों को देखने और उनसे प्रेरणा लेने का प्रयास करना चाहिए।
महाराजश्री ने कहा कि गुणग्राही दृष्टि व्यक्ति को जीवन के प्रति सकारात्मक बनाती है। इसलिए हर परिस्थिति में अच्छाई को देखने, अच्छे विचारों को अपनाने और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ
मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन एवं प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया कि आचार्यश्री के सान्निध्य में आयोजित मंगल प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया।
श्रद्धालुओं ने महाराजश्री के मंगल प्रवचन का श्रवण किया और आत्मकल्याण की प्रेरणा प्राप्त की। प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं को जीवन में सकारात्मक सोच, उत्तम भाव और गुणग्राही दृष्टिकोण अपनाने का संदेश मिला।
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