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    ब्रिक्स का साझा घोषणापत्र जारी, पीएम मोदी ने दिया संकल्पों को परिणाम में बदलने का संदेश

    नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सभी सदस्य देशों ने आपसी सहमति के साथ एक साझा घोषणापत्र जारी किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक को बेहद सार्थक और रचनात्मक बताते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को चलाने के लिए पुराने संस्थान अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। उन्होंने वैश्विक शासन में सुधार के लिए प्रतिनिधित्व, संवेदनशीलता और नियम निर्माण—तीनों मोर्चों पर बदलाव को अनिवार्य बताया है।

    साझा घोषणापत्र और भारत की कूटनीतिक सफलता

    ब्रिक्स देशों के बीच लंबी और मैराथन बैठकों के बाद एक संयुक्त बयान पर सहमति बनी है। भू-राजनीतिक तनाव और ईरान, सऊदी अरब तथा यूएई जैसे देशों के बीच गहरे मतभेदों के बावजूद भारत की कूटनीतिक कुशलता ने सभी को एक मंच पर लाने में सफलता हासिल की। भारत के प्रयासों से यह सुनिश्चित हुआ कि क्षेत्रीय विवादों के कारण ब्रिक्स की समग्र प्रक्रिया बाधित न हो और एक व्यापक संयुक्त घोषणापत्र पर मुहर लग सके।

    ग्लोबल साउथ की भागीदारी और पीएम मोदी के प्रस्ताव

    शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भविष्य की तकनीक और नियम निर्माण में 'ग्लोबल साउथ' की बराबर भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने वैश्विक गवर्नेंस रिफॉर्म के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव दिया, जिसे अगली समिट तक एक ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप का रूप दिया जा सके। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को अब और टाला न जाने की बात कही गई है।

    शी जिनपिंग का बयान और अन्य कूटनीतिक गतिविधियां

    इस बीच, कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट केमेलुली टोकायेव भी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच गए हैं। वहीं, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में कहा कि चीन पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में शांति व स्थिरता कायम करने के लिए अन्य ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर काम करने को पूरी तरह तैयार है।

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